अब ग़ज़ियाबाद में नही उड़ सकेगा प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का मख़ौल, शासन की तरफ से जीडीए को जारी हुए आदेश
गाजियाबाद। राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद को देश के सबसे प्रदूषित शहर का तमगा मिल चुका है। वेस्ट यूपी में सबसे अधिक राजस्व देने के बाद भी बदनामी का तमगा झेलने पर अब योगी सरकार नाराज हो गई है। लगातार महानगर में प्रदूषण को लेकर उड़ाई जा रही धज्जी को शासन की तरफ से गंभीरता से लिया गया है। हाल ही में औद्योगिक क्षेत्र में श्यामा मुखर्जी पार्क में देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी फट गया था। अब इसके लिए यूपी सरकार की तरफ से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को हवा और पानी के प्रदूषण पर नजर रखने के लिए आदेश जारी किए गए है। अगर इन नियमों का उल्लंघन किया गया तो शासन की तरफ से क़ड़े कदम उठाए जाएगें।
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प्रमुख सचिव आवास की तरफ से जारी किए निर्देश
प्रदूषण नियंत्रण मानकों के साथ होने वाली गड़बड़ी को शासन ने गंभीरता से लिया है। प्रमुख सचिव आवास ने इसे लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को निर्देश जारी किए हैं। जिसमें स्पष्ट शब्दों में विकास कार्यों का दौरान होने वाले वायु और जल प्रदूषण पर नियंत्रण कसने की बात कही गई है। आदेश में निर्माण की साइटों पर सावधानी बरते जाने औऱ एनजीटी के तमाम नियमों का पालन किए जाने की बात कही गई है। प्रमुख सचिव आवास का कहना है कि हवा के कण किसी भी सूरत में नहीं उड़ने चाहिए। इसके लिए वहां पर सुनिश्चित किया जाए कि वहां पर पानी का छिड़काव हो। इसके अलावा पानी को प्रदूषण से बचाने के लिए हर संभव कोशिश की जाए। जितने भी अवैध रूप से बोरवेल साइट्स पर चल रहे है इन्हे बंद कराया जाए।
प्राधिकरण अधिकारी का कहना
जीडीए सचिव संतोष कुमार राय ने बताया कि शासन की तरफ से इसके संबंध में आदेश जारी किए गए है। प्राधिकरण की टीमें शहर में मिलकर आदेशों को पालन कराने के लिए काम करेगी। ये पक्का किया किया जाएगा कि निर्माण साम्रगी खुले में ना रखी जाए। इसके अलावा निर्माण के दौरान अवैध रूप से जल का दोहन ना हो। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।