बीजेपी के पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh ने आरक्षण पर बड़ा बयान दिया है। सवर्णों, पिछड़ों और “असली हकदार” पर उनकी राय ने बहस तेज कर दी। आइये जानते है पूरा मामला।
देश में आरक्षण को लेकर चल रही नई बहस के बीच बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवर्ण समाज की स्थिति, पिछड़ी जातियों के अधिकार और आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कई बयान दिए। उनके मुताबिक असली संघर्ष सवर्ण और पिछड़ों के बीच नहीं, बल्कि पिछड़ों के भीतर ही है। जहां कुछ प्रभावशाली लोग दूसरों का हक छीन रहे हैं।
आरक्षण के मुद्दे पर जारी बहस के बीच बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन कर लेगा। लेकिन आरक्षण की मांग नहीं करेगा। उनका कहना था कि यह एक तरह का संकल्प है। जिसमें सवर्ण मजदूरी या छोटे-मोटे काम करके भी जीवन चला लेंगे।
उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक शिक्षा पर सवर्णों का दबदबा रहा। लेकिन अब आरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। बृजभूषण ने दावा किया कि आरक्षण की सूची बनाते समय कई जातियों को सुविधा के हिसाब से शामिल किया गया। जिससे व्यवस्था में असंतुलन पैदा हुआ।
पूर्व सांसद ने विशेष रूप से पिछड़ी जातियों के भीतर असमानता का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक पिछड़े वर्ग के अंदर ही कुछ ताकतवर और प्रभावशाली लोग आगे निकल गए हैं। वही दूसरों के अधिकारों पर कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि असली नुकसान इन्हीं “नकली पिछड़ों” से हो रहा है। जो व्यवस्था का फायदा उठाकर बाकी लोगों का हक छीन रहे हैं। सवर्ण और पिछड़ी जातियों के संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दोनों के बीच किसी तरह की दुश्मनी नहीं है। उनका मानना है कि विवाद की असली वजह वही लोग हैं। जो खुद को पिछड़ा बताकर लाभ ले रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बीते दशकों में पिछड़े वर्ग के अधिकांश लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है।
बृजभूषण शरण सिंह ने यह भी कहा कि सवर्ण समाज अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज कई सवर्ण लोग मजदूरी, रिक्शा चलाने और छोटे व्यवसायों में लगे हुए हैं। उनके अनुसार सामाजिक स्थिति में यह बदलाव साफ दिखाई देता है।
अंत में उन्होंने कहा कि आने वाले लंबे समय तक सवर्ण आरक्षण की मांग नहीं करेंगे। लेकिन इससे पिछड़े वर्ग के सभी लोगों का भला होगा। ऐसा भी नहीं है। उनका मानना है कि उच्च पदों पर बैठे कुछ लोग ही ज्यादा लाभ उठा रहे हैं। जबकि आम लोगों तक उसका फायदा सीमित ही पहुंच पा रहा है।