यूजीसी कानून के विरोध में अधिकताओं ने आज जोरदार प्रदर्शन किया। योगी और मोदी सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की। कानून वापस न होने पर अधिवक्ताओं ने उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
Intro: गोंडा जिले में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने यूजीसी कानून के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। कचहरी परिसर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कानून को शिक्षा और छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
गोंडा जिले की कचहरी परिसर में मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे अधिवक्ताओं ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) कानून के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्र हुए। सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित यूजीसी कानून देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है। इससे छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि यूजीसी कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। इसे लागू न किया जाए। अधिवक्ताओं का तर्क है कि इस कानून के लागू होने से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त हो सकती है। जिससे शैक्षणिक संस्थानों की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होगी।
अधिवक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्त बनाए रखना जरूरी है। ताकि वे शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रख सकें। उनका आरोप है कि यूजीसी कानून से शिक्षा का स्तर गिरने की आशंका है। इससे छात्रों को नुकसान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा को केंद्रीकृत करने से नवाचार और अकादमिक स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा।
धरना-प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सरकार से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यूजीसी कानून को लेकर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और विरोध प्रदर्शन व्यापक स्तर पर किया जाएगा।