बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने राहुल गांधी पर एक बार फिर तंज कसा। उन्होंने कहा कि राहुल से मिलने के लिए 6 महीने का वेटिंग चल रहा है। ऐसे में पार्टी कैसे चलेगी। यूजीसी और शंकराचार्य विवाद पर उन्होंने बड़ा बयान दिया।
पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने यूजीसी से जुड़े मुद्दे, राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कई विषय समाज से जुड़े हैं। इसलिए बिना पूरी जानकारी के बोलना उचित नहीं है।
बृजभूषण सिंह ने यूजीसी से जुड़े विवाद पर कहा कि यह एक गंभीर और समाज से जुड़ा विषय है। उन्होंने बताया कि वह इस विषय का अध्ययन कर रहे हैं। और जो भी बोलेंगे, सोच-समझकर ही बोलेंगे। उनका कहना था कि बिना पूरी जानकारी के किसी भी मुद्दे पर बयान देना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में किसी तरह का सामंजस्य निकालने की जरूरत है। जब उनसे पूछा गया कि यूजीसी को लेकर व्यापक विरोध हो रहा है। और लोग बीजेपी की राज्य और केंद्र सरकार का विरोध कर रहे हैं। तो उन्होंने कहा कि वह अपनी बात कर रहे हैं। और जो भी कहेंगे, सोच-समझकर कहेंगे। अभी अध्ययन कर रहे हैं। उसके बाद ही कुछ बोलेंगे।
राहुल गांधी से जुड़े सवाल पर बृजभूषण सिंह ने कहा कि फिर से बात राहुल गांधी पर आ गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पर वह पहले ही काफी बोल चुके हैं। और अब इस पर बोलना उचित नहीं समझते। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि राहुल गांधी से मिलने के लिए छह महीने का समय चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान समय में छह महीने का “वेटिंग” चल रहा है। जब उनके कार्यकर्ता ही उनसे छह-छह महीने तक नहीं मिल पा रहे हैं। तो पार्टी कैसे चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का विजन बहुत अच्छा है। और जनता यह बात 2029 में समझ पाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव से छह महीने पहले सब कुछ साफ हो जाएगा।
अपने उस बयान पर सफाई देते हुए, जिसमें उन्होंने अगल-बगल के सांसदों को “भुंनगा” कहा था। बृजभूषण सिंह ने कहा कि उनसे जुबान फिसल गई थी। उन्होंने बताया कि उनका आशय किसी का अपमान करना नहीं था। बल्कि यह कहना था कि जैसे भुंनगा गायब हो जाता है। वैसे ही सांसद गायब रहते हैं।
प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर उन्होंने कहा कि यह संतों और परंपरा से जुड़ा विषय है। इस बारे में वही लोग बेहतर बता सकते हैं कि परंपरा क्या है और उसका उल्लंघन हुआ है या नहीं। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रशासन ने अपना काम किया है। और उनका कोई व्यक्तिगत नजरिया नहीं है।