गोंडा डीएम प्रियंका निरंजन की सख्ती से कई विभागों में हड़कंप मच गया है। शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पाए जाने पर लेखपाल को जहां सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं। वहीं सात अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया है। एसडीएम और डीपीआरओ को नोटिस जारी की गई है।
गोंडा डीएम प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जन शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया। डीएम ने स्पष्ट कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक शिकायत का पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए। अन्यथा जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।
डीएम ने समीक्षा के दौरान विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। जांच में पाया गया कि कुछ विभागों द्वारा शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए खंड विकास अधिकारी, बभनजोत तथा नेडा विभाग के बाबू का वेतन रोकने के निर्देश दिए। इसी क्रम में असंतोषजनक फीडबैक मिलने पर डीओ पीआरडी का वेतन रोकने तथा जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। डीएम ने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए।
जनता दर्शन में प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए लापरवाही सामने आने पर उपजिलाधिकारी, मनकापुर को शोकाज नोटिस जारी करने तथा संबंधित ग्राम के लेखपाल को निलंबित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि जनता दर्शन शासन और प्रशासन के बीच सीधा संवाद का माध्यम है, इसलिए इसमें प्राप्त प्रकरणों का गंभीरता से निस्तारण अनिवार्य है।
इसके अतिरिक्त असंतुष्ट फीडबैक के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षक, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड-2, आबकारी अधिकारी और अधिशासी अभियंता विद्युत का वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। बैठक के अंत में डीएम ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया कि आईजीआरएस पोर्टल की शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें।