गोंडा

गोंडा में बाढ़ से हालात खराब, एल्गिन-चरसडी बांध का वजूद समाप्त होने की कगार पर

गोंडा में बाढ़ से हालात खराब, एल्गिन-चरसडी बांध का वजूद समाप्त होने की कगार पर
5 min read
Aug 29, 2017
Flooding
Flood

गोंडा. ग्राम नकहरा के सामने एल्गिन-चरसडी बांध का वजूद समाप्त होने को है। पिछले तीन दिनों में घाघरा की कटान से करीब 450 सौ मीटर से अधिक बांध का हिस्सा नदी में समा चुका है। वहीं घाघरा खतरे के निशान से नीचे आने का नाम नहीं ले रही है। खतरे के निशान से करीब 40सेंटीमीटर ऊपर बह रही घाघरा का तांडव जारी है। बांध के करीब तीन सौ मीटर की दूरी में कटान तेजी से जारी है। लगातार घाघरा उग्र होती जा रही है।

लगातार हो रही तेज कटान के आगे बांध का बचाव कार्य महज दिखावा साबित हो रहा है। बल्ली पाइलिंग, ब्रिकरोरा, पेंडो की डाल, एवं बालू भरी बोरियों को ड़ाल कर कटान रोकने की कवायदें बेकार साबित हुईं। नदी के इस उग्र रूप को देखकर बांध बचाव कार्य में लगे अधिकारियों ने हाथ खड़े कर लिए हैं। बीते दो दिनों में करीब 300 मीटर से अधिक बांध का हिस्सा नदी में समा चुका है। लगातार कटान जारी है। कटान की स्थिति देख कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले सप्ताह में बांध के स्थान पर नदी की धारा बहेगी।

ग्राम नकहरा के सामने तो बांध का हिस्सा लगभग कट चुका है। तथा बांध के स्थान पर अब नदी की धारा बह रही है। नदी की धारा अब नकहरा गांव की ओर बह रही है। इसके अलावा अब नदी ग्राम बेहटा के सामने बांध में कटान करने में जुट गई है। करीब तीन सौ मीटर से अधिक बांध के हिस्से में नदी तेजी से कटान कर रही है। तथा बांध नदी में समा रहा है। बांध पर मौजूद अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि बांध पर नदी की धारा का दबाव लगातार बना हुआ है। बांध को बचाने के जिस सामग्री की आवश्यकता होती है वह सामग्री बांध पर नहीं आ पा रही है। गांव में पानी भरा है और बांध पर ग्रामीणों ने शरण ले रखी है। जिससे सामग्री को लाने में अवरोध एंव बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है।

बाढ़ प्रभावित नारकीय जीवन को मजबूर

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की स्थिति लगातार नारकीय होती जा रही है। कहीं जलभराव, तो कहीं कीचड़, कहीं गांव को पानी ने घेर रखा है तो तमाम मजरे अभी पानी से डूबे हैं। घाघरा का पानी कभी घटता है तो कभी बढ़ता है। बाढ़ का पानी क्षेत्र से निकलने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे बाढ़ की स्थिति लगातार क्षेत्र में बनी हुई है।

करनैलगंज तहसील की बाढ़ से प्रभावित 102 ग्राम पंचायतों के 824 मजरों में से करीब 60 ग्राम पंचायतों के 450 मजरे अभी भी बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित है। बाकी मजरों को बाढ़ के पानी ने घेर रखा है या फिर गांव में दलदल या कीचड़ से ग्रामीणों का निकलना मुहाल है। घाघरा के मुहाने पर बसे गांवों में अभी भीषण बाढ़ है। गांवों में करीब 5 से 10 फिट तक पानी भरा हुआ हैं। उन गांवों से आसपास के गांवों में पानी का बहाव होने से करीब 150 मजरे बाढ़ के पानी से घिरे है। जहां नावें चल रही हैं। इसके अलावा पसका क्षेत्र में बाढ़ का कहर अभी जारी है। ग्राम नकहरा, काशीपुर, घरकुंइया, बहुवन मदार माझां, गौरा सिंहपुर, रेक्सडिया, प्रतापपुुर, बसेरिया पूरेअंगद, पूरेअजब, परसावल, नैपूरा, कमियार, बेहटा, मांझा रायपुुर, सहित तमाम ग्राम पंचायतों को बाढ़ के पानी ने पूरी तरह से घेर रखा है।

बारिस ने बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें बढ़ाई

जमकर हुई बारिस ने बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें बढ़ा दी है। बाढ़ की त्रास्दी से बेघर हो चुके लोगों के सामने अब समस्याओं का अम्बार खड़ा है। भोजन, पानी, रहना, सोना, दवा इलाज व पशुओं की चारे का संकट हर बाढ़ पीड़ित के चुनौती दे रहा। किसी का घर गिर गया है, तो किसी की झोपड़ी पानी में बह गई।

जिनके पास राशन है उसे ईंधन की चिंता सता रही है। कुछ लोग अभी तक राशन पाने से वंचित हैं। जिन्हें किट के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है। नकहरा, काशीपुर, गुमदहा, अतरसुइया, वैद्यपुर, प्रतापपुर, घरकुइंया, रेक्सड़िया, पूरेअंगद, पूरेअजब, बहुवनमदार माझा सहित कई अन्य गांवों में अभी भी लोगों के घरों में पानी घुसा है। जिससे तमाम लोगों के घर भी गिर चुके हैं। उन्हें सर छुपाने के लिए केवल तिरपाल ही एक मात्र सहारा रह गया है।

गांवों में पानी भरा होने की वजह से हैंडपंप व नल भी डूबे हुए हैं। शुद्ध पानी न मिलने की वजह से लोग उन्हीं हैंडपंपों का दूषित पानी पीने के लिए विवस हैं। जहां से पानी वापस हो चुका है वहां लोग छोटी-छोटी बीमरी से ग्रसित हैं। अधिकतर लोग बुखार, पेटदर्द, सरदर्द, फुन्सी एवं पैर सड़ने से पीड़ित हैं। बाढ़ राहत केंद्रों पर संचालित स्वास्थ्य शिविरों तक पहुंचने वाले मरीजों को इलाज हो जाता है। उन्हें दवाइयां भी मिल जाती है। लेकिन जो लोग शिविर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं उनकी समस्याएं यथावत बनी हुई हैं। फसलेें सड़ चुकी हैं, भूसा बाढ़ की भेट चढ़ गया। जिससे पशुओं के चारे का संकट गहरा गया है। लोग पानी में डूबी फसलों को खेत से काटकर लाते हैं। और उसे साफ करके पशुओं के खाने योग्य बनाते हैं। बाढ़ की समस्या खत्म होने के बाद भी बाढ़ पीड़ितों की समस्यएं कम नहीं होगी। फसले बर्बाद हो जाने के कारण उन्हें भोजन की व्यवस्था अब स्वयं करनी पड़ेगी।

दबंग ले जा रहे राहत सामग्री

बाढ़ पीड़ितों में वितरण के लिए आई सामग्री को गांव के दबंगों द्वारा उठा ले जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। मामला ग्राम लालेमऊ का है। यहां बाढ़ से करीब एक दर्जन मजरे बुरी तरह से प्रभावित थे। अभी भी महज सड़कों से पानी कम हुआ है कई मजरे अभी भी पानी से घिरे हैं। बाढ़ प्रभावित मजरों में लालेमऊ डीहा, बैशनपुरवा, नउवनपुरवा, पंडितपुरवा के करीब पांच दर्जन ग्रामीणों ने हस्ताक्षर करके एक प्रार्थना पत्र दिया है कि गांव में जो भी राशन किट बाढ़ पीड़ितों के लिए आई थी। उसे गांव के दबंग किस्म के लोग उठा ले गये। तहसीलदार रमेश बाबू ने बताया कि मामले में जांच कराई जायेगी कि जिसके नाम सूची में हैं उन्हें राशन किट मिली या नहीं यदि नहीं मिली है तो वितरण करने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई होगी।

मंत्री ने बांटा राहत सामग्री

प्रदेश की बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार अनुपमा जायसवाल ने सर्किट हाउस पहुंचकर जिले के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की तथा आवश्यक निर्देश दिए।


राहत कार्यों की समीक्षा के दौरान राज्यमंत्री ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को सख्त चेतावनी दी कि जिले में पोषाहार बिकने की शिकायतें अब पूरी तरह बन्द हो जानी चाहिए। वरना शासन स्तर पर कार्यवाही होने जा रही है। सर्किट हाउस मीटिंग हाल में उन्होंने विधायकों तथा अधिकारियों से राहत कार्यों का फीडबैक लिया। मीटिंग के उपरान्त परसपुर विकासखण्ड अन्तर्गत बाढ़ क्षेत्र भौरीगंज एवं तहसील करनैलगंज अन्तर्गत पाल्हापुर राहत केन्द्र में स्थापित बाढ़ राहत केन्द्र पर पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों से मिलकर उनका हाल-चाल जाना तथा उन्हें जिला प्रशासन द्वारा मुहैया कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

भौरीगंज में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जी प्रदेश के बाढ़ग्रस्त जिलों पर स्वयं सतत नजर बनाएं हुए हैं, और लगातार समीक्षा कर रहे हैं। हर बाढ़ पीड़ित को राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम लोग चाौबीस घंटे सतर्क हैं तथा हर प्रकार की आपदा से निपटने के लिए सभी अधिकारी हर वक्त तैयार रहें।पाल्हापुर राहत केन्द्र पर मंत्री ने रास्ते में बीमार पड़ी एक गाय को देखकर अपना काफिला रूकवा दिया और स्वयं उसके पास पहुंच गईं।

वहीं पर उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को बुलाकर निर्देश दिए कि गाय का बेहतर से बेहतर इलाज कराएं तथा दो दिन बाद उसका हाल-चाल भी उन्हे दें। शाहपुर राहत केन्द्र पर जनपद बाराबंकी के बाढ़ शरणार्थियों द्वारा मंत्री को अवगत कराया गया कि राहत सामग्री खुली व कम दी जा रही है। इस पर उन्होंने डीएम को निर्देश कि राहत कार्य में मानक और जरूरत का पूरा ध्यान रखा जाए तथा किसी भी दशा में खुली खाद्य सामग्री न बांटी जाएं।

Published on:
29 Aug 2017 11:33 am