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Gonda: कचहरी से घर लौट रहे वकील पर गांव के पास हुआ था जानलेवा हमला, 3 साल बाद आरोपी को मिली 7 साल की सजा

Gonda News: गोंडा में अधिवक्ता शिवशंकर तिवारी पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला करने के मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी अंजनी पाण्डेय को सात साल की जेल और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुलाई 2023 में कचहरी से घर लौटते समय उन पर हमला किया गया था।
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Updated: 30 Oct 2026, 5:57 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर फोटो जेनरेट AI

Gonda News:गोंडा में कचहरी से घर लौट रहे अधिवक्ता पर जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। गांव के पास घात लगाकर बैठे आरोपी ने धारदार हथियार से हमला कर अधिवक्ता को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। करीब तीन साल तक चले मुकदमे के बाद सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात साल के कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

गोंडा जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र में अधिवक्ता पर जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने आरोपी अंजनी पाण्डेय को सात साल की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश दुर्ग नरायन सिंह ने 30 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने उस पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

कचहरी से लौटते समय किया था हमला

पुलिस के मुताबिक, घटना 20 जुलाई 2023 की है। कोतवाली देहात क्षेत्र के पूरे उदई गांव के रहने वाले चन्द्रप्रकाश तिवारी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उनके पिता शिवशंकर तिवारी पेशे से अधिवक्ता हैं। घटना वाले दिन वह कचहरी से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान गांव के पास पहले से घात लगाकर बैठे अंजनी पाण्डेय पुत्र दुर्गा प्रसाद पाण्डेय ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि अंजनी ने पहले उनके साथ गाली-गलौज की और फिर जान से मारने की नीयत से धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में शिवशंकर तिवारी के सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। अचानक हुए हमले के बाद उन्होंने शोर मचाया तो आसपास से गुजर रहे राहगीर और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए।

जान से मारने की धमकी देकर भागा था आरोपी

लोगों को आता देखकर आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गया था। इसके बाद चन्द्रप्रकाश तिवारी की तहरीर पर कोतवाली देहात पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंजनी पाण्डेय को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी

इस मामले को ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिन्हित अपराधों में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य गंभीर अपराधों में दोषियों को अदालत से जल्द और प्रभावी सजा दिलाना है। मुकदमे में मॉनिटरिंग सेल, लोक अभियोजक बसंत शुक्ला, कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल मार्कण्डेय सिंह और कोतवाली देहात के पैरोकार कांस्टेबल अतुल ने प्रभावी पैरवी की। पुलिस के अनुसार, अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अंजनी पाण्डेय को दोषसिद्ध करार दिया। इसके बाद उसे सात साल के कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

Updated on:
30 Oct 2026, 5:57 PM IST
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