
गोंडा में पत्रकार की मौत के बाद मुख्यमंत्री राहत कोष की जांच रिपोर्ट को लेकर विवाद बढ़ गया है। मृतक पत्रकार की पत्नी सायरा बानो ने क्षेत्रीय प्रभारी लेखपाल आर.के. मिश्रा पर रिश्वत मांगने, फर्जी रिपोर्ट भेजने और पति को परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लेखपाल के निलंबन के साथ FIR दर्ज कराने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यूनियन ने भी कार्रवाई न होने पर मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की है।
मृतक पत्रकार की पत्नी सायरा बानो ने अधिकारियों को दिए पत्र में बताया कि उनके पति गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इलाज में करीब सात लाख रुपये खर्च होने का अनुमान था। शासन की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष से 12 अगस्त 2026 को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता पहले ही स्वीकृत की गई थी। इलाज जारी रखने के लिए शेष सहायता राशि के लिए दोबारा आवेदन किया गया था।
पत्नी के मुताबिक, आवेदन की मौके पर जांच की जिम्मेदारी क्षेत्रीय प्रभारी लेखपाल आर.के. मिश्रा को दी गई थी। आरोप है कि लेखपाल ने अनुकूल रिपोर्ट लगाने के बदले उनके पति से रिश्वत की मांग की। बीमारी के कारण बिस्तर पर होने के बावजूद उन्हें बार-बार बुलाया गया। सायरा का आरोप है कि रिश्वत देने में असमर्थता और स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनके पति जांच के लिए नहीं पहुंच सके। इसके बाद लेखपाल ने अधिकारियों को कथित तौर पर गलत और भ्रामक रिपोर्ट भेज दी। पत्नी का कहना है कि इसी वजह से शेष आर्थिक सहायता समय पर नहीं मिल सकी और इलाज में परेशानी हुई।
सायरा ने बताया कि उनके पति ने मृत्यु से पहले एक वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने लेखपाल पर रिश्वत मांगने और परेशान करने के आरोप लगाए थे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध होने की बात कही गई है।
सायरा ने लेखपाल के खिलाफ निलंबन और FIR दर्ज कराने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने भ्रष्टाचार, कथित फर्जी रिपोर्ट और लापरवाही की जांच कराने की भी मांग की है।
मामले में जांच कर रहे अधीक्षक एसएन सिंह से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन फोन नहीं उठा। यूनियन अध्यक्ष कैलाश वर्मा ने इसकी जानकारी सीएमओ संतलाल को दी। उन्होंने कहा कि पत्रकार को न्याय नहीं मिला तो यूनियन अधीक्षक और तहसीलदार को भी जांच के दायरे में शामिल करते हुए मजिस्ट्रेटी जांच की मांग करेगा।
फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।