Gonda News: डीएम की जांच में 1979 के दस्तावेजों में हेरा फेरी का खुलासा होने के बाद कूट रचना में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश से हड़कंप मच गया है।
Gonda News: डीएम नेहा शर्मा की जांच में फर्जी बड़े का बड़ा खुलासा हुआ है। भू- माफिया ने पैतृक भूमि हड़पने के लिए 1979 के दस्तावेजों में राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिली भगत से हेरा फेरी की गई। इसके बाद 2019 में जालसाजो ने इस जमीन का बैनामा करा लिया। समाधान दिवस में डीएम से इसकी शिकायत हुई थी। इसके बाद जांच में खुलासा होने के बाद डीएम ने दोषियों पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
Gonda News: गोण्डा डीएम ने सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर और भूमाफियाओं द्वारा की गई जालसाजी के मामले में कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। यह मामला सरकारी अभिलेखों में कूटरचना, पैतृक भूमि की धोखाधड़ी और भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है। डीएम ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रशासन ऐसी आपराधिक गतिविधियों पर पूरी तरह सतर्क है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मोतीगंज थाना क्षेत्र के ग्राम डड़वा दसवतिया के रहने वाले पवन कुमार सिंह ने 4 जनवरी 2025 को डीएम नेहा शर्मा के शिकायती प्रार्थना-पत्र दिया। इसमें पवन सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी पैतृक भूमि, गाटा संख्या-196 मि0 (1.914 हेक्टेयर), को भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से हड़पने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि उप निबंधक कार्यालय गोण्डा के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से वर्ष 1979 के जिल्द संख्या-904 के विलेख संख्या-163 के वास्तविक पन्नों को हटाकर कूटरचित पन्ने लगाए गए। इसके आधार पर गोरखनाथ सिंह के नाम से फर्जी विलेख तैयार किया गया। वर्ष 2019 में अजय सिंह और अशोक कुमार सिंह ने इसी कूटरचित दस्तावेज के आधार पर भूमि का बैनामा करवा लिया।
डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य राजस्व अधिकारी से जांच कराई। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई। विलेख संख्या-163 में कूटरचना की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उक्त दस्तावेज मानक से भिन्न थे। गलत तरीके से तैयार किए गए थे। अन्य विलेखों से इन दस्तावेजों में भिन्नता स्पष्ट नजर आई। इसके बाद पाया गया कि सरकारी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए इन दस्तावेजों के माध्यम से भूमि का फर्जी हस्तांतरण किया गया।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने तुरंत एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया। उन्होंने कहा, "सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और जालसाजी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। साथ ही, जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग को निर्देश दिया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए।