गोंडा

“हम बोझ हैं तो कह दो… 2027-2029 में हिसाब बराबर करेंगे!” बृजभूषण का राजनीतिक दलों को खुला ऐलान

बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने बेबाक बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। एक बार फिर उन्होंने विजय उत्सव के एक कार्यक्रम में राजनीतिक दलों को खुली चुनौती देते हुए कहां कि “अगर हम बोझ हैं तो साफ कह दो,” यह कहते हुए उन्होंने 2027-2029 में ताकत दिखाने का ऐलान कर सियासत गरमा दी।

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Apr 24, 2026
संबोधित करते बृजभूषण सिंह फोटो सोर्स फेसबुक अकाउंट

गोंडा की कैसरगंज सीट से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बिहार के भागलपुर में आयोजित वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव के मंच से राजनीतिक दलों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है कि उनकी उपयोगिता खत्म हो चुकी है। तो साफ कह दिया जाए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि वक्त आने पर वे अपनी ताकत और अहमियत साबित कर देंगे।

बिहार के भागलपुर में आयोजित वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव कार्यक्रम के दौरान पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने भाषण से राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। क्षत्रिय समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि डरने या निराश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी को लगता है कि वे अब बोझ बन चुके हैं। तो खुलकर कह दिया जाए। उन्होंने कहा कि 2027 या 2029 में यह बात कह दी जाए। उसके बाद वे अपनी भूमिका और ताकत खुद साबित कर देंगे।

देश के स्वतंत्रता का श्रेय कुछ चुनिंदा व्यक्तियों तक सीमित कर दिया

अपने संबोधन में उन्होंने आजादी के इतिहास को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि देश की स्वतंत्रता का श्रेय कुछ चुनिंदा व्यक्तियों तक सीमित कर दिया गया। जबकि कई महान योद्धाओं और क्रांतिकारियों को उचित पहचान नहीं मिल पाई। उन्होंने झांसी की रानी, वीर कुंवर सिंह, महाराजा देवी बक्श सिंह और बिरसा मुंडा जैसे नामों का जिक्र करते हुए कहा कि इन वीरों के योगदान को भुला दिया गया।

जो समय पर आवाज नहीं उठाते, इतिहास भी उन्हें जिम्मेदार मानता

उन्होंने अपने वक्तव्य में यह भी स्वीकार किया कि इस मुद्दे पर समाज की चुप्पी भी एक बड़ी गलती रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग समय पर आवाज नहीं उठाते, इतिहास उन्हें भी जिम्मेदार मानता है। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत कमी बताते हुए कहा कि वे इन महान व्यक्तित्वों को उनका उचित स्थान दिलाने में सफल नहीं हो सके।

संविधान केवल अंबेडकर का नहीं बल्कि 242 सदस्य शामिल थे

संविधान को लेकर भी उन्होंने एक बयान दोहराया कि संविधान सभा में केवल डॉ. भीमराव अंबेडकर ही नहीं, बल्कि 242 सदस्य शामिल थे। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अगर किसी को आपत्ति है। तो खुलकर चर्चा की जा सकती है। उनके अनुसार, उस समय बिहार के प्रतिनिधियों की संख्या भी काफी अधिक थी। फिर भी समाज को यह सोचना चाहिए कि उनसे कहां चूक हुई।

हमें आत्म मंथन कर अपनी कमजोरी को पहचान की जरूरत

अपने भाषण में उन्होंने भगवान राम, बप्पा रावल और महाराणा प्रताप के आदर्शों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि समाज उनके रास्ते पर चलता तो आज उसकी स्थिति अलग होती। उन्होंने लोगों से आत्ममंथन करने और अपनी कमजोरियों को पहचानने की अपील की। अंत में उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए तीन चीजें बेहद जरूरी हैं। बल, बुद्धि और विद्या। उन्होंने कहा कि इन गुणों को अपनाकर ही समाज अपनी खोई हुई पहचान और सम्मान को वापस पा सकता है।

Updated on:
24 Apr 2026 10:56 am
Published on:
24 Apr 2026 09:26 am
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