
कैलाश वर्मा
गोंडा. देवी पाटन मंडल से सटे हिन्दू राष्ट्र पड़ोसी देश नेपाल में दिवाली त्योहार पर गजब का उल्लास है। पांच दिनों तक दिवाली त्योहार को नेपाल में तिहार पर्व के रुप में मनाया जाता है। इसे दिवाली और यमपंचक त्योहार भी कहा जाता है। नेपाल में तिहार पर्व पर कुत्तों के अलावा कई अन्य जानवरों की भी पूजा की परम्परा है। यहां के मधेसी इलाकों में दीपावली का त्योहार काफी उत्साह व जोश से मनाया जाता है। पांच दिनों तक मनाये जाने वाले तिहार पर्व पर कौवे, कुत्तों, गाय बैलों के पूजा की परम्परा है। जानवरों के प्रति प्रेम दर्शाने वाले तिहार त्योहार की शुरुआत धनतेरस से शुरू होता है।
कौए की पूजा से शुरुआत
पांच दिनों तक मनाये जाने वाले तिहार पर्व पर कई अन्य जानवरों की भी पूजा की परम्परा है। पहले दिन त्रयोदशी को ‘काग तिहार‘ पर यमराज के दूत के रूप में कौवे का पूजन होता है जिसमे घरों के छतों पर रख कर मिष्ठान और स्वादिष्ट भोज कराने की परम्परा है।
चर्तुदशी को कुत्तों की होती पूजा
दूसरे दिन चर्तुदशी को ‘कुकुर तिहार‘ पर्व पर भगवान भैरव के प्रतिरुप कुत्ते की पूजा लोग करते हैं। इस दिन कुत्तों के सिर पर लाल रोली लगा कर फूलों की माला पहनाते हैं व मिष्ठान का भोग लगता है। नेपाल की पुलिस भी यह त्योहार धूमधाम से मनाती है। विभिन्न कार्यालयों में पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी डाग प्रशिक्षण केन्द्र पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुत्तों को चंदन टीका लगाने के बाद उन्हें फूल माला पहनाकर उनकी पूजा करते हैं और भोजन कराते हैं। पुलिस और लोगों का मानना है कि कुत्ते उनकी सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। यह उन्हें सभी कष्टों से बचाने वाले भैरव देवता के वंशज हैं।
अमावस्या को गाय और लक्ष्मी की होती पूजा
तीसरे दिन अमावस्या को ‘गाय तिहार‘ पर देवी लक्ष्मी के रूप में गाय के माथे पर तिलक लगाकर और फूल माला पहनाकर पूजा की जाती है। इसी दिन सायंकाल गणेश और धन देवी लक्ष्मी की पूजा कर लोग सुख समृद्धि की कामना करते हैं। रात भर नाच-गाना का कार्यक्रम चलता रहता है। इस दौरान घरों को सजाया संवारा जाता है। दीपक और बिजली की रोशनी से पूरा घर सराबोर रहता है। युवक युवतियां घर-घर जाकर गीत गाते हैं और नृत्य करते हैं तो गृहस्वामी उन्हें मिष्ठान, फल के साथ कुछ बख्शीश भी देते हैं।
श्रद्धा पूर्वक होती है बैल की पूजा
चौथे दिन प्रतिपदा को शक्ति के देवता के रुप में बैल की भी श्रद्धा पूर्वक पूजा की जाती है। गोवंश को पहाड़ों का प्रतिनिधि भी माना जाता है। इसी दिन गोर्वधन पूजा की भी परम्परा सदियों से चली आ रही है।
द्वितीया के दिन भाईदूज
पांचवें दिन द्वितीया पर भारत की तरह नेपाली बहनें भी भाइयों के सम्मान में भाईदूज मनाती हैं। इस त्योहार में बहनें भाइयों को टीका लगाती हैं। बदले में भाई बहनों को उपहार देते हैं। भारत के साथ-साथ नेपाल के मधेसी इलाकों में दीपावली का त्योहार काफी उत्साह व जोश से मनाया जाता है। तिहार पर्व के दौरान नेपाल के मधेसी क्षेत्र में भी अवकाश रहता है।
नेपालियों के लिए महापर्व है दिवाली
पांच दिनों तक चलने वाले इस त्योहार को नेपाली समाज के लोग महापर्व के रुप में मनाते हैं। इस दौरान यहां के लोग विभिन्न प्रकार के शाकाहारी और मांसाहारी पकवान बनाते हैं। इसमें मेहमानों के आतिथ्य की भी अलग परम्परा है। त्योहार के दौरान पूरा नेपाल उल्लास में डूबा रहता है। इस त्योहार पर दूर दराज क्षेत्रों, दूसरे देशों में काम कर रहे लोग स्वदेश अवश्य लौट आते हैं।
सीमावर्ती गांवों में भी तिहार पर्व मनाने की है परम्परा
श्रावस्ती जिले के कठकुइंयां निवासी धर्मवीर थारु बताते हैं कि वे पूर्वजों की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। इस गांव में अब तक किसी ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस मान्यता से मुंह नहीं मोड़ा है। पहले इस परम्परा का प्रभाव भारतीय क्षेत्र में भी हुआ करता था। यहां भी तिहार पर्व को पूरे उल्लास से मनाया जाता था। लेकिन अब यह नेपाल सीमा से सटे भटकाही, कठकुइंयां, सुहेलवा आदि आधा दर्जन भारतीय गांवों में ही सिमट कर रह गई है। अब यह परम्परा वहीं रह गई है, जिन गांवों में नेपाल के थारु जाति के लोग रहते हैं।