यूपी में 6 जिलों की लाइफलाइन समझा जाने वाला इस पुल के बंद होने से यात्रियों को अब दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। अब 2 महीने तक यह पुल बंद रहेगा। वैकल्पिक मार्ग से सिर्फ हल्के वाहन गुजरेंगे।
सरयू नदी पर बने संजय सेतु को दो महीने के लिए बंद कर दिया गया है। जिससे हजारों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन ने विकल्प के तौर पर पीपा पुल चालू किया है। लेकिन यहां से केवल हल्के वाहन ही गुजर सकेंगे। भारी वाहनों और बसों को अब लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। जिससे समय के साथ-साथ यात्रियों पर अतिरिक्त किराए का बोझ भी बढ़ गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सरयू नदी पर बने संजय सेतु को मरम्मत कार्य के चलते दो महीने के लिए बंद कर दिया है। इस फैसले के बाद गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, बाराबंकी और सिद्धार्थनगर समेत आसपास के जिलों के लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सेतु बंद होने के कारण अब बसों और भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से होकर गुजरना पड़ रहा है। जिससे यात्रा लंबी और महंगी हो गई है।
प्रशासन ने राहत के तौर पर संजय सेतु के पास एक पीपा पुल शुरू किया है। लेकिन इस पुल पर केवल मोटरसाइकिल, कार, जीप, स्कूल वैन और एंबुलेंस जैसे हल्के वाहनों को ही अनुमति दी गई है। भारी वाहन और रोडवेज बसें इस पुल से नहीं जा सकतीं। इसलिए उन्हें अयोध्या या चहलारी घाट के रास्ते भेजा जा रहा है।
बलरामपुर डिपो से लखनऊ के लिए चलने वाली बसों में बदलाव किया गया है। अब कई बसें अयोध्या और चहलारी घाट के रास्ते जा रही हैं। इसी तरह गोंडा से भी अधिकतर बसों को अयोध्या होते हुए भेजा जा रहा है। जबकि कुछ बसें चहलारी घाट के रास्ते निकल रही हैं। हालांकि चहलारी घाट का रास्ता दूरी में कम है, लेकिन खराब सड़कों के कारण बसों को वहां से भेजना मुश्किल हो रहा है।
इस बदलाव का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, किराया करीब 132 रुपये तक बढ़ गया है। देवीपाटन मंडल के लगभग 20 हजार यात्रियों को रोजाना कुल 26 लाख 40 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि बाराबंकी की ओर अस्थायी बस अड्डा शुरू कर दिया जाए। तो यात्री पीपा पुल को पैदल पार कर दूसरी ओर बस पकड़ सकते हैं। इससे यात्रियों को अतिरिक्त किराया देने से राहत मिल सकती है। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि संजय सेतु पर मरम्मत कार्य पूरा होने में करीब दो महीने लगेंगे। तब तक लोगों को इसी वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे सफर करना होगा। जिससे उनकी परेशानी और खर्च दोनों बढ़े रहेंगे।