बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो महीने में 851 मासूमों की मौत
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो महीने में 851 मासूमों की मौत
गोरखपुर. 'अगस्त' बिता तो कुछ राहत हुई कि, मासूमों का कातिल महीना बीत गया। लेकिन सितम्बर भी बच्चों का गुनहगार निकला। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सितम्बर ने भी 433 मासूमों की मौत हो गई। इसमें सबसे अधिक 247 मौत नवजात बच्चों की हुई है। पिछले साल इस सितम्बर में 372 मौतें हुई थीं।
बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनों (अगस्त माह) बच्चों की मौत पर राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दी गूंज अब शान्त तो हो चुकी है, लेकिन यहां माओं की कोख उजड़ने और मौत का रूदन बढ़ता ही जा रहा। इंसेफेलाइटिस तो मासूमों की कातिल बनी हुई थी नवजात बच्चों के लिये भी यह सुरक्षित नहीं रहा।
मंत्रीजी सितम्बर भी तो मार रहा बच्चों को
मेडिकल कॉलेज में मौतों के आंकड़ों पर गौर करें तो इस महीने ही 433 मासूमों की जान जा चुकी है। इन बच्चों में सबसे अधिक मरने वाले नवजात हैं जिनकी उम्र 1 दिन से 29 दिन की है। सितम्बर महीने में 247 नवजात काल के गाल में समा चुके हैं। जबकि बालरोग विभाग में 186 मौतें इस महीने हुई है। इन 186 मौतों में इंसेफेलाइटिस के भी मरीज शामिल हैं।
बता दें कि, मेडिकल कॉलेज में अगस्त महीने में 418 मासूमों की मौतें हुई थी। इसमें करीब 223 बच्चों की मौत नियोनेटल वार्ड की आईसीयू में हुई है। जबकि 2016 के अगस्त के 364 मौतें हुई थी।
सरकार के वरिष्ठ मंत्री/ प्रवक्ता ने कहा था अगस्त में तो मौतें होती रहती
अगस्त महीना में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की हुई मौतों पर सरकारी लापरवाही को ढकने की कोशिश में प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री व सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कई सालों के मौतों का आंकड़ा पेश किया था। आंकड़ों को दिखाते हुए उन्होंने कहा था कि, अगस्त महीना में तो बच्चे मरते ही हैं। लेकिन अगस्त क्या सितम्बर भी सैकड़ों माताओं की कोख उजाड़ गया, पर सरकार से लेकर हर कोई चुप्पी साधे हुए है।
उधार के संसाधन से पुख्ता इंतजाम का दावा
9-10 अगस्त को ऑक्सीजन की कमी से हुई मासूमों की मौत के बाद पूरे देश में बीआरडी मेडिकल काॅलेज की अव्यवस्था उजागर हुई थी। सरकार का पूरा तंत्र इसके बाद सक्रिय हो गया था। जल्दी स्पेशलिस्ट डॉक्टर बुलाये गए। करीब 20 डॉक्टर्स को अन्य मेडिकल कॉलेज व पीएमएस से यहां भेजा गया। नियोनेटल वार्ड के आईसीयू में वार्मर की कमी दूर करने के लिए 41 वार्मर विभिन्न जगहों से मंगाए गए। हर स्तर पर माॅनिटरिंग शुरू हो गई। दावे तो तमाम होते गए, लेकिन अभी भी स्थितियों में कोई सुधार नहीं है। मौतें जारी है और सरकार आंकड़ों में उलझी हुई।
input- धीरेंद्र गोपाल