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वाह रे थानेदार साहब…मंदिर के नाम पर ऑन लाइन वसूले चंदा, जांच करेंगे CO

गोरखपुर पुलिस में तैनात एक दारोगा का अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है। यहां एक थाने में तैनाती के दौरान वह अपने पैतृक गांव में मंदिर बनाने के लिए थानाक्षेत्र के लोगों से ऑनलाइन चंदा लेने का मामला आया है।

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Up news, gorakhpur

फ़ोटो सोर्स: सोशल मीडिया, इंस्पेक्टर का कारनामा

गोरखपुर के एक थाने पर तैनात थानेदार ने गांव में मंदिर बनाने के लिए खाते में चंदा लेने का आरोप है। एंटी करप्शन कोर आफ इंडिया के प्रदेश महासचिव इसकी शिकायत की है। उन्होंने मुख्यमंत्री, डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह, एडीजी और डीआइजी को शिकायती पत्र भेजा है। साथ में आनलाइन ट्रांजेक्शन के प्रमाण भी दिए हैं। यह मामला सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, इसे संज्ञान में लेते हुए SP साउथ दिनेश पुरी ने सीओ गोला को जांच सौपी है।

पैतृक गांव में बनवा रहे हैं मंदिर, तैनाती स्थल पर लोगों से ले रहे हैं चंदा

एंटी करप्शन कोर आफ इंडिया के प्रदेश महासचिव बालेंदु प्रसाद ओझा ने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि प्रभारी निरीक्षक अपने पैतृक गांव स्थित एक मंदिर के निर्माण के नाम पर क्षेत्र के आम नागरिकों और ग्राम प्रधानों से चंदा एकत्र कर रहे हैं। पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने कुछ लोगों पर चंदा देने के लिए दबाव भी बनाया है।

उन्होंने पत्र में दावा किया है कि चंदा रसीदों में दानदाताओं द्वारा दी गई राशि अंकित की गई है, लेकिन काउंटर फाइल पर कोई विवरण दर्ज नहीं है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने लेन-देन के साक्ष्य भी दिए

चंदा देने वालों में कुछ ने नकद तो कुछ ने थानेदार के बैंक खाते में आनलाइन माध्यम से धनराशि जमा की है। शिकायतकर्ता ने लेन-देन के साक्ष्य भी दिए हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आशंका जताई है कि एकत्र धनराशि का दुरुपयोग किया जा सकता है। इस संबंध में एसपी दक्षिणी दिनेश पुरी ने बताया कि शिकायत में लगे आरोपों की जांच सीओ गोला दरवेश को दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

कुशीनगर में तैनाती के दौरान भी चर्चा में आए थे

कुशीनगर जनपद में तैनाती के दौरान भी इन पुलिस निरीक्षक द्वारा अवैध शराब की तस्करी कराए जाने की जानकारी प्राप्त हुई थी। DIG गोरखपुर परिक्षेत्र व तत्कालीन SP कुशीनगर राजीव नारायण मिश्रा द्वारा इसका संज्ञान लेते हुए एक IPS गौरव बांसवल को गहन जांच हेतु आदेशित किया गया। जांच में उक्त पुलिस निरीक्षक को दोषी पाया गया। उक्त IPS अधिकारी की संस्तुति पर एक CO की तहरीर पर इसके विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया गया, जिसमें बाद में दोषमुक्त कर दिया गया।