बिजली निगम के कुछ कर्मचारी बिजली बिल को कम करके सरकारी राजस्व को घाटा पहुंचा रहे हैं।
बक्शीपुर खंड के कुछ कर्मचारियों से साठगांठ करके बिजली के बिलों में हेराफेरी करके सरकार को चूना लगाया जा रहा है। मुख्य अभियंता ने मामले की जांच के लिए अधिशासी अभियंता और लेखाकार को नामित किया है।
नथमलपुर के राधेश्याम शर्मा ने शिकायत की है कि बक्शीपुर खंड में एक कनेक्शन साल 1971 में लिया गया। 30 अगस्त 2005 को उपभोक्ता के बिल पर 31,751 रूपए का बिल बकाया हो गया था।
इस कनेक्शन पर 2008 तक लगभग 70 हजार रुपये बिल बकाया हो गया। मुख्यमंत्री और निगम के चेयरमैन को लिखे शिकायती पत्र में, उपभोक्ता ने 2005 से 2015 तक के बीच के कनेक्शनों और बिलों की जांच की मांग की है।
पहली बार 2008 में शिकायत की थी शिकायत
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जब पहली बार 2008 में शिकायत की थी, तो विभाग के अधिकारियों ने प्रार्थनापत्र को दबा लिया था। बड़ी मुश्किल से प्रार्थनापत्र वापस मिले हैं।
दो सदस्यों की टीम गठित की गई
जांच के लिए दो सदस्यों की टीम गठित की है। इसमें अधिशासी अभियंता इंद्रराज यादव और लेखाकार उत्कृष्ठ सिंह शामिल हैं। जांच अधिकारियों ने बताया कि जांच के लिए 11 बिंदुओं पर वितरण खंड से सवालों