अयोध्या में राममंदिर निर्माण प्रकरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राममंदिर पर सीधे बोलने से बचते हुए यह कहा कि श्रीराम भारत की आस्था के विषय हैं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मन्दिर बनें यह समाज राष्ट्र तय करेगा किन्तु रामराज्य की स्थापना तो हम अपने पुरूषार्थ से कर सकते है। सन्त-महात्मा और देश की जनता रामराज्य को चरितार्थ करने के लिए सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चले, सरकार अपना काम प्रारम्भ कर चुकी है। राम को रोटी से जोड़कर हर गरीब को रोटी, आवास, कपड़ा, दवाई, बिजली, पानी और सुरक्षा जैसे मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही होगा तभी रामराज्य आ सकता है। भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर के साथ-साथ ऐसे रामराज्य की स्थापना के लिए आगे आना होगा।
मुख्यमंत्री शनिवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 49वीं एवं ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ महाराज की चतुर्थ पुण्यतिथि समारोह में ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ महाराज की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि सांस्कृतिक भारत की पुर्नप्रतिष्ठा का युग प्रारम्भ हो चुका है। उसका पूर्वाभास देश की जनता को हो रहा है। एक नये युग के भारत की आहत आप सभी को सुनाई दे रही होगी। किन्तु देश की जनता सरकार के द्वारा किये जा रहे प्रयत्नों के साथ खड़ी हो और हम एक साथ मिलकर भारत को परमवैभव का प्रतिष्ठित स्थान दिलाएं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक राष्ट्रीयता अपना स्पष्ट आकार ले रही है। उन्होंने भारत के ऋषि परम्परा के प्रसार के योग को अन्र्तराष्ट्रीय मान्यता दिलाई। भारत की सनातन कुम्भ की परम्परा को यूनेस्को द्वारा दुनिया की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर की मान्यता दिलाई है। आयुष्मान भारत के अन्तर्गत देश के 50 करोड़ गरीब परिवारों को एक वर्ष में 5 लाख रूप्ये की निःशुल्क चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराने का अद्वितीय निर्णय लिया है यह दुनिया की सबसे बड़ी चिकित्सा योजना है। 4 करोड़ परिवारों को विद्युत कनेक्शन दिये गये है। करोड़ो परिवारों को आवास उपलब्ध करा दिये गये है। यह बदलते भारत की वहीं तस्वीर है जिसकी परिकल्पना हिन्दुव और राष्ट्रीयता के प्रबल पक्षधर मेरे गुरूदेव महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज किया करते थे। वर्तमान कुम्भ हम संतो को और दुनिया की जनता को गंगा में निर्मल अविरल जल देंगे।
मुख्यमंत्री महन्त योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरू को श्रद्धान्जलि देते हुए कहा कि महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज समन्वय, सहनशीलता, संस्कार, प्रखर-राष्ट्रभक्ति, समाज सेवा की प्रतिमूर्ति थे। गोरखनाथ मन्दिर के स्वरूप का जो खाका महन्त दिग्वजयनाथ जी महाराज ने तैयार किया, महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज ने उसे पूर्ण किया। मध्यकाल में इस पीठ ने अनेक झंझावट झेले है। विदेशी आक्रान्ताओं का यह मन्दिर शिकार हुआ। किन्तु महन्त दिग्विजयनाथ जी महाराज ने इसके पुराने वैभव को प्राप्त किया। महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज ने उसे और भव्य स्वरूप दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य को सेवा का साधन बनाकर इस पीठ ने जन सेवा को ही भगवान की सेवा मानकर कार्य किया है। 48 शिक्षण-प्रशिक्षण, स्वास्थ्य एवं सेवा के संस्थान मन्दिर द्वारा संचालित है।
जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द ने कहा कि राष्ट्र-सन्त महन्त अवेद्यनाथ महाराज भारतीय संस्कृति, हिन्दू चिन्तक, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे। श्रीगोरखनाथ मन्दिर भारत की संस्कृति, संस्कारों और परम्परा का मन्दिर है। प्रदेश में परिवर्तन की जो आध्यात्मिक लहर जो प्रारम्भ हुई है वह निश्चित ही लोक कल्याणकारी एवं लोक मंगल सिद्ध होगी।
श्रीराम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष मणिराम छावनी, अयोध्या के महन्त नृत्यगोपालदास ने कहा कि गोरक्षपीठ ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को सजोकर रखने एवं देश को धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक नेतृत्व दिया। महन्त अवेद्यनाथ महाराज हम सभी साधु-सन्त समाज के सर्वमान्य धर्म नेता थे। नाथ पंथ के इस महान तपस्वी के जीवन में सम्पूर्ण सनातन धर्म दिखता था। उन्होंने कहा कि मैं महन्त जी से सन् 1971 से जुड़ा रहा हूँ। महन्त जी जैसा महापुरूष नहीं देखा, गोरक्षपीठ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविन्दवल्लभ पंत से केन्द्र की सरकार ने रामलला की मूर्ति हटाने को कहा तो गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त दिग्विजयनाथ महाराज गोरखपुर से हजारों भक्तों को लेकर वहाॅ उस स्थान को घेर लिया और आज तक रामलला की मूर्ति हटाने की किसी को साहस नहीं हुआ। रामजन्म भूमि मुक्ति आन्दोलन को गति देने के लिए महन्त अवेद्यनाथ महाराज ने इसकी अध्यक्षता स्वीकार की और उनके नेतृत्व में आन्दोलन चला।
जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य ने कहा कि जो लोग धर्म और धर्मनिरपेक्षता और धर्मस्थानों के आपसी सम्बंधों पर अनेक प्रश्न खड़ा करते है ऐसे लोगों को धर्म समझने के लिए इस गोरक्षपीठ में आकर देखना चाहिए। उन्हें धर्म का वास्तविक अर्थ समझ में आ जायेगा। धर्म की भारतीय अवधारणा को इस पीठ ने व्यवहारिक रूप में जमीन पर उतारा है। इस पीठ ने समाज को यह बताया है कि भारत के सनातन संस्कृति का मठ और मन्दिर कैसा होता है। समाज को उस मठ-मन्दिर से क्या अपेक्षाएं होती है और मठ-मन्दिर समाज को क्या देते हैं। श्रीगोरक्षनाथ मन्दिर भारत में आदर्श मन्दिर का उदाहरण है। जहाॅ तक धर्म और राजनीति का प्रश्न का है उसके साक्षात् प्रमाण भगवान कृष्ण है जिन्होंने धर्म के साथ राजनीति के बल पर ही विकसित समाज स्वावलम्बी राष्ट्र की पुर्नप्रतिष्ठा की थी।
भारत सरकार के पूर्व गृहराज्य मंत्री परमार्थ आश्रम, हरिद्वार के स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा कि महन्त अवेद्यनाथ महाराज के साथ लोक सभा में कार्य करने का मुझे सौभाग्य मिला था। उनका स्वअनुशासन, कार्य के प्रति निष्ठा, जन सरोकारों के प्रति जवाबदेही, धर्म की राजनीति में प्रतिष्ठा के प्रयत्न, समाज के असहाय, गरीब, दलित, पीड़ित के प्रति उनकी छटपटाहट हम सबको प्रेरणा देती थी। उन्होंने भारतीय संस्कृति के ‘चरैवेति-चरैवेति’ मंत्र को अपने जीवन में उतारा था।
श्रद्धांजलि सभा में जगद्गुरू अनंतानन्द द्वाराचार्य स्वामी डाॅ.रामकमलदास वेदान्ती ने कहा कि धर्म के दो आयाम लौकिक और परमार्थिक दोनों को आदर्श रूप में हिन्दू समाज में प्रतिष्ठित करने के लिए महन्त जी ने निरन्तर प्रयत्न किया और हिन्दू समाज का मार्गदर्शन किया। इन्ही दिव्यात्माओं से प्रेरणा लेकर अपने अन्तरंग एवं बहिरंग को शुद्ध कर हिन्दू समाज की सेवा एवं मानवता का कल्याण हम अपने जीवन का लक्ष्य बनाये। यहीं इन सन्तों को वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।
दिगम्बर अखाड़ा, अयोध्या के महन्त सुरेशदास ने कहा कि समाज की शक्ति संगठन में है और अवेद्यनाथ महाराज ने समाज को संगठित करके शक्तिशाली बनाया।
इस कार्यक्रम में सिद्ध योग पत्रिका के सम्पादक सिद्ध गुफा सवाई आगरा के ब्रह्मचारी दासलाल, उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. ईश्वरशरण विश्वकर्मा, हरिद्वार के महन्त शान्तिनाथ, मुख्य पुजारी, श्रीगोरखनाथ मन्दिर के योगी कमलनाथ, देवीपाटन मन्दिर तुलसीपुर के महन्त मिथलेशनाथ, कालीबाड़ी के महन्त रवीन्द्रदास महाराज, श्री हनुमान मन्दिर गोरखनाथ के महन्त प्रेमदास, अयोध्या के महन्त राममिलनदास, चचाईमठ के महन्त पंचाननपुरी आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का प्रारम्भ दोनों ब्रह्मलीन महाराज जी के चित्र पर पुष्पांजलि से हुआ।
कार्यक्रम का संचालन डाॅ. श्रीभगवान सिंह ने किया।