ईद-उल-अजहा
बकरीद पर तीन दिनों तक कुर्बानी चलती है। इस्लामिक परम्परा के अनुसार इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है। अपने परिवार के सदस्य की तरह बकरों को कुर्बानी के लिए पाला जाता है। हालांकि, बदलते जमाने में कुर्बानी के एक-दो पहले भी लोग बकरों को खरीदकर घर ले आते हैं और उसे एकआध दिन पालने के बाद कुर्बानी देते हैं।
लाजिमी है बकरीद नजदीक आते ही बकरों की बाजार शहर से देहात तक सज जाती है। गोरखपुर में भी बकरों की दुकानें सजी है। कुर्बानी के लिए एक से एक नायाब बकरे इन दिनों इन बाजारों में लोगों के आकर्शण का केंद्र बने हुए हैं। एक से दो साल के कई बकरे हैं जिनकी कीमत लाखों में पहुंच चुकी है।
गोरखनाथ के बाजार में इन दिनों ऐसा ही एक बकरा सभी के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। इस बकरे के मालिक निजामुद्दीन अपने बकरे को पांच लाख मांग रहे। सलमान नाम के इस बकरे के बारे में मालिक बताते हैं कि उसे इन्होंने बहुत ही प्यार से पाला है। अपने बेटे को जितना दुलार नहीं दिया जितना इसे दिया है। निजामुद्दीन के अनुसार सलमान अभी दो साल का है। उनका दावा है कि सलमान बेड पर सोता है। घर के सदस्य जो खाना खाते हैं इसे भी खिलाते हैं। उन्होंने बताया कि अपने इस प्यारे सलमान को वह काजू-किशमिश सहित अन्य हेल्थी डाइट देते हैं। उन्होंने बताया कि एक साल पहले देखा गया कि सलमान की पीठ पर अरबी में अल्लाह लिखा है। हम लोगों ने इसे अल्लाह की नेमत मानकर और सेवा-सत्कार करना शुरू कर दिया। फिलवक्त, सलमान को दो लाख पचहत्तर हजार में खरीदने वाले खरीदार मिल रहे हैं लेकिन निजामुद्दीन अपने सलमान को साढ़े तीन लाख तक बेचने का मन बना रहे हैं।
कुर्बान अली और मोहब्बत अली की कीमत भी एक लाख से अधिक
इसी बाजार में इमरान भी अपने दो बकरों को लेकर आए हैं। इनका नाम कुर्बान अली और मोहब्बत अली है। कुर्बान और मोहब्बत को इमरान बहुत प्यार से पाले हैं। घर के लोग इनकी सेवा में लगे रहते हैं। इनका कहना है कि दोनों की कीमत उन्होंने डेढ़ लाख रुपये लगाई है। इसके आसपास कोई रकम दे देगा तो वह सौदा तय कर लेंगे।