गोरखनाथ मंदिर में आयोिजित कार्यक्रम में आए थे स्वामी चिन्मयानंद
पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि जिन्दगी वन्दगी बन सके इसके लिए गंदगी के खिलाफ स्वच्छता अभियान को जन-आन्दोलन बनाना होगा। तीर्थ, देवस्थान, चिकित्सालय, विद्यालय, स्टेशन सहित सभी जगहों को स्वच्छ और सुन्दर रखने की जिम्मेदारी जनता की भी है। स्वच्छता को हमें आचरण का हिस्सा बनाना होगा।
पूर्व मंत्री गुरुवार को गोरखनाथ मन्दिर में ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ महाराज की 49वीं पुण्यतिथि एवं ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ महाराज की चतुर्थ पुण्यतिथि समारोह के अन्तर्गत ‘स्वच्छ भारत समर्थ भारत की आधार-शिला है’ विषयक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।
पूर्व गृह राज्य मंत्री/ परमार्थ आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। भारत में ऋषि और कृषि पर आधारित ज्ञान-विज्ञान और सामथ्र्य तथा समृद्धि का नवीन मार्ग प्रशस्त हो चुका है। दुनिया में भारत की यश-प्रतिष्ठा के पुनर्स्थापना का नवयुग के हम साक्षी बन रहें हैं। ईश्वर की कृपा से भारत को एक ऐसा प्रधानमंत्री तथा उत्तर प्रदेश को एक ऐसा मुख्यमंत्री प्राप्त हुआ है जो जगद्गुरू भारती की पुर्नप्रतिष्ठा के यज्ञ में दिन-रात अपनी कर्माहुति डालने में तल्लीन हैं। योग-अध्यात्म-धर्म एवं संस्कृति की प्रतिष्ठा एवं दुनिया में उसकी स्वीकार्यता हेतु भारत के प्रयत्न का रथ अहर्निश बढ़ रहा है। समर्थ और समृद्ध भारत की पुष्ठभूमि तैयार हो चुकी है। ऐसे में भारत के शासन-प्रशासन के साथ-साथ जनता का एक-एक प्रयत्न, एक-एक कदम महत्वपूर्ण है। स्वच्छ भारत अभियान इसी समर्थ भारत अभियान की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि भारत आचार-विचार का देश है। हम ईश्वर द्वारा रचित भारत भूमि के निवासी है। धर्म-अध्यात्म हमारी पहचान है। ऐसे में स्वच्छता हमारी इसी अध्यात्मिक विरासत की देन है।
कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब भारत के लाल किला से 15 अगस्त 2014 को स्वच्छता के अभियान का आहवान किया तो बहुतों को यह समझ में ही नहीं आया कि यह स्वच्छता अभियान समर्थ भारत अभियान का श्री गणेश है।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर में शिक्षा शास्त्र के अध्यक्ष प्रो. नरेश प्रसाद भोक्ता ने कहा कि किसी भी रोग के मूल में गन्दगी है। सभी रोगो के जीवाणु गन्दगी में होते हैं। समर्थ राष्ट्र की आधार-शिला जनता है, युवा है। स्वस्थ युवा ही स्वस्थ राष्ट्र का आधार है। राष्ट्र स्वस्थ होने के लिए स्वस्थ युवा चाहिए। अच्छे स्वास्थ की गारंटी स्वच्छता ही है। स्वच्छता केवल शरीर की नही, मन, बुद्धि की स्वच्छता के साथ आत्मा की पवित्रता से ही व्यक्तित्व विकास का मार्ग खुलेगा तभी व्यष्टि से समष्टि और समष्टि से सृष्टि और सृष्टि से परमीष्टि की ओर हम बढ़ सकेगे। स्वच्छता देखना हो तो आज से पाॅच हजार वर्ष पूर्व भारत की सभ्यता के प्रतीक मोहनजोदड़ो, हड़प्पा के नगरों को देखना चाहिए। उन्नीसवीं शताब्दी तक यूरोप को कोई ऐसा देश नहीं जो इन हड़प्पा मोहनजोदड़ो का स्वच्छता में मुकाबला कर सके। सभी विदेशी यात्रियों ने यहाॅ के स्वच्छता की भूरि-भूरि प्रसंशा की है। स्वच्छता के प्रति प्राचीन भारतीयों को निष्ठा का दुनिया लोहा मानती रही है। नदियाॅ स्वच्छता की प्रतीक है। स्वच्छता पढ़ाने से नहीं आचरण से होता है।
विशिष्ट अतिथि काशी से पधारे जगद्गुरू अनंतानन्द द्वाराचार्य स्वामी डाॅ. रामकमलदास वेदान्ती ने कहा कि स्वच्छ तन-मन और परिवेश में ही ईश्वर का वास होता है। लोक-जीवन में स्वच्छता, शुचिता जिस दिन आचरण-व्यवहार की हिस्सा बनेगा भारत का अभ्युदय शुरू हो जाएगा। स्वच्छता एक संस्कार है, आचार है, विचार है, संकल्प है।
सवाईगुफा आगरा से पधारे ब्रह्मचारी दास लाल ने कहा कि मनु जी महाराज कहते है शरीर मन बुद्धि को स्वच्छ रखकर ही हम भगवान तक पहुॅच सकते हैं। वाह्य स्वच्छता शुद्धता और सात्विकता का प्रथम चरण है। भारत की शास्त्र परम्परा में जगह-जगह स्वच्छता अर्थात शुद्धता की अनिवार्यता प्रतिपादित की गयी है।
सम्मेलन में प्रस्ताविकी प्रस्तुत करते हुए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पूर्व कुलपति प्रो. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि स्वच्छता हमारे राष्ट्र की संस्कृति का हिस्सा है। यह हमारी प्रकृति है। इसका अर्थ आन्तरिक और वाह्य शुद्धता से है। भारत के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने स्वच्छ भारत का अभियान प्रारम्भ कर भारत के आध्यात्मिक पुनर्जागरण का अभियान छेड़ा है। हम सभी इस अभियान को अपना अभियान बनाए और भारत को दुनिया में प्रतिष्ठित स्थान पर पहुॅचाने अपनी भूमिका सुनिश्चित करें।
सम्मेलन में मंच पर दिगम्बर अखाड़ा अयोध्या के महन्त सुरेशदास, नैमिषारण्य के स्वामी विद्या चैतन्य, कटक उडीसा के महन्त शिवनाथ, बड़ौदा के महन्त गंगा दास, महन्त मिथलेशना, महन्त रविन्द्र दास, महन्त प्रेमदास, महन्त राममिलनदास, महन्त पंचानन पुरी आदि सन्त महात्मा उपस्थित थे।
मेजर पटेश्वरी सिंह, माधवेन्द्र प्रताप सिंह, डाॅ. अरविन्द्र चतुर्वेदी, अरूण कुमार सिंह, डाॅ. शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने अतिथियो को माल्यार्पण का स्वागत किया। संचालन डाॅ. श्री भगवान सिंह ने किया।