गोरखपुर से डिजिटल अरेस्ट का बड़ा मामला आया है। यहां एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को साइबर अपराधियों ने चार दिनों तक बंधक बना कर अपने इशारों पर नचवाया। इस दौरान पीड़ित से तीस लाख रुपए वसूल किए। बाद में जब उसे खुद को ठगे जाने का एहसास हुआ तब उसने मुकदमा दर्ज कराया।
शहर के रामगढ़ ताल थानाक्षेत्र से हैरान करने वाली खबर है, यहां साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड हेल्थ वर्कर को डिजिटल अरेस्ट कर चार दिनों में ही 30 लाख वसूल लिए। पीड़ित विजयेंद्र पांडे की तहरीर पर साइबर अपराध थाने में बुधवार को केस दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के सिद्धार्थ इन्क्लेव का है। विज्येंद्र ने पुलिस को बताया कि एक अगस्त को उनके मोबाइल पर सुबह 9:37 बजे फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को एसबीआई कस्टमर सर्विस विभाग से बताया। उसने क्रेडिट कार्ड पर 1.96 लाख रुपये बकाए की बात कही। इसके बाद उसने बताया कि मुंबई क्राइम ब्रांच को रिकवरी के लिए भेजा गया है। आपको क्राइम ब्रांच अधिकारी सोनल राठौर का नंबर भेजा हूं। उस पर बात करके सेंटलमेंट कर लें। इस पर विज्येंद्र ने बोला कि वह न तो मुंबई में रहते हैं, न ही उनके पास कोई क्रेडिट कार्ड है। इस पर बोला गया कि फिर भी बात कर लें वरना आपके घर क्राइम ब्रांच की टीम जाएगी।
विज्येंद्र ने उस नंबर पर फोन किया तो उन्हें बताया गया कि उनके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल मनी लांड्रिंग में किया गया है। केनरा बैंक अधिकारी सुरेश अनुराग के मनी लांड्रिंग मामले में आपका भी नाम आया है। इसमे 2.5 करोड़ रुपये का गोलमाल हुआ है। इस पर विज्येंद्र ने बताया कि यह सब गलत है। इसके बाद उन्हें उसी नंबर से वीडियो कॉल आई। उसमे एक महिला पुलिस की वर्दी पहनकर बैठी थी। उसके पीछे दीवार पर बड़ा सा क्राइम ब्रांच मुंबई का लोगो लगा था।
पीड़ित ने बताया कि महिला अधिकारी के मांगने पर विज्येंद्र ने वाट्सएप पर आधार कार्ड भेजा। उसे देखने के बाद अधिकारी ने कहा कि आप इस केस में शामिल हैं। आप जांच में मदद करें वरना आपको घर से क्राइम ब्रांच की टीम उठाकर मुंबई लाएगी। इस पर विज्येंद्र जांच में मदद करने के लिए तैयार हो गए। महिला अधिकारी के कहने पर हर घंटे वीडियो कॉल करके अपना अपडेट देते रहे। इसी बीच महिला अधिकारी ने उनसे बैंक में जमा रुपये और डिटेल भेजने के लिए कहा। साथ में एक सुप्रीम कोर्ट का लेटर भेजा जिसमे एक बैंक का खाता नंबर रुपये जमा करने के लिए दिया गया। उन्हें बताया गया कि आरबीआई जांच के बाद रुपये वापस भेज देगी।
विज्येंद्र ने तीन से चार बार में बैंक में जमा रुपये और एफडी तुड़वाकर जितनी भी रकम थी सब मिलाकर कुल 30 लाख रुपये दिए गए अकाउंट नंबर में भेज दिए। इसके बाद उन्हें हर घंटे अपडेट देने के लिए कहा गया। एक जुलाई से चार जुलाई तक वह हर घंटे वाट्सएप पर अपडेट देते रहे लेकिन बाद में जब कोई जवाब उधर से नहीं आया तब उन्होंने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
इस मामले में एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि रिटायर स्वास्थ्य कर्मी को डिजिटल अरेस्ट कर 30 लाख रुपये जालसाजी का मामला सामने आया है। इसमें केस दर्ज कर लिया गया है। पीड़ित से डिटेल लेकर पुलिस जालसाजों का पता लगाएगी। इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं। लोगों को खुद जागरूक होना होगा।