गोरखपुर चिड़ियाघर में वन्यजीव अब महंगा और शाही खाना खाकर अपना जीवन व्यतीत करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान का 27 मार्च को लोकार्पण करेंगे।
गोरखपुर. गोरखपुर चिड़ियाघर में वन्यजीव अब महंगा और शाही खाना खाकर अपना जीवन व्यतीत करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान का 27 मार्च को लोकार्पण करेंगे। लोकार्पण के बाद यह चिड़ियाघर लोगों के घूमने और वन्यजीवों को देखने के लिए खोल दिया जाएगा। इन वन्यजीवों को पालने के लिए प्रशासन को हर माह बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। यहां के बब्बर शेर के खान पान और उसकी देखरेख के लिए 70 हजार रुपये तो दरियाई घोड़े को पालने के लिए 25 हजार रुपये की रकम खर्च करनी पड़ती है। इसी तरह अन्य वन्यजीवों के लिए भी हाईफाई खर्च होता है।
प्रकृति और रहन सहन के अनुसार होती है खानपान की व्यवस्था
चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि चिड़ियाघर में वन्यजीवों की देखरेख और खानपान की व्यवस्था उनकी प्रकृति और रहन सहन के अनुसार की जाती है। इसी आधार पर इनके रख रखाव पर हर महीने होने वाले खर्च का निर्धारण किया जाता है। इस पर बड़ी रकम खर्च होती है। मांसाहारी वन्यजीवों के लिए यह खर्च और बढ़ जाता है। उनके लिए प्रत्येक दिन जहां मांसाहारी भोजन की व्यवस्था करनी पड़ती है तो वहीं शाकाहारी वन्यजीवों के लिए उनकी रुचि की ताजी घास व अन्य खाद्य पदार्थों का इंतजाम करना पड़ता है। मांसाहारी वन्यजीवों के लिए रोजाना लखनऊ से गोश्त मंगवाया जाता है। इसके लिए चिड़ियाघर के एक स्लॉटर हाउस से ठेका लिया गया है। वहीं शाकाहारी वन्यजीवों के लिए घास की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की जाती है।
इस वन्यजीव पर हर माह होता है इतना खर्च
बब्बर शेर - 70,000
गैंडा - 25,833
तेंदुआ - 22,900
भेडिया - 16,750