गोरखपुर

इस वजह से बीजेपी को भा रहे शिवपाल, सीएम योगी भी हो रहे मेहरबान

उपचुनाव में हार के बाद समीकरण बदलने की कोशिश

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शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव

क्षेत्र की नौ लोकसभा सीटों पर शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया कई दलों का खेल बिगाड़ सकती है। पुराने समाजवादियों में शिवपाल यादव के संबंध और यादव-मुस्लिम मतों में बिखराव से गठबंधन को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है तो उपचुनाव हार मुश्किलों में दिख रही बीजेपी इससे राहत महसूस कर रही।
गोरखपुर-बस्ती मंडल में नौ लोकसभा सीटें हैं। गोरखपुर, बांसगांव सुरक्षित, देवरिया, सलेमपुर, महराजगंज, कुशीनगर, बस्ती, डुमरियागंज व संतकबीरनगर। बीते लोकसभा चुनाव में सभी नौ सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर संसदीय सीट खाली करने के बाद हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने जबर्दस्त कमबैक करते हुए बीजेपी की तीस साल पुरानी सीट को छीन लिया। इस सीट को जीतने के बाद से ही बीजेपी की मुश्किलें भी बढ़ती गई। वजह यह कि इस उपचुनाव ने कई दशक पुरानी सपा-बसपा की दुश्मनी को भूलाकर एक कर दिया था। सपा-बसपा की एका ने बीजेपी की नींद उड़ा दी थी। इसलिए क्योंकि सपा के परम्परागत यादव व मुसलमान वोटर के साथ बसपा का बेस दलित वोट एक साथ आ सकता था। इससे नए राजनैतिक समीकरण का भी उदय हुआ। राजनीतिक पंडित बताते हैं कि सपा-बसपा के एकमंच पर आने से ओबीसी और दलित वोटर के साथ मुसलमान भी एकतरफा साथ आ जाता। यह बीजेपी के लिए खतरे की घंटी थी। बीजेपी लगातार इसका काट खोजने में लगी थी। इस बीच सपा परिवार में रार ने बीजेपी को थोड़ी राहत दे दी। शिवपाल यादव के दल बनाने से अब सपा महागठबंधन के लिए परेशानी का सबब है।
राजनैतिक पंडितों की मानें तो सपा से निकले शिवपाल यादव की समाजवादियों में खासी पकड़ है। सूत्रों की मानें तो गोरखपुर-बस्ती मंडल के ढेर सारे दिग्गज सपाई व पुराने समाजवादी शिवपाल यादव के संपर्क में हैं। ऐसे में अगर शिवपाल यादव की पार्टी गोरखपुर और आसपास के लोकसभा क्षेत्रों से चुनाव में आई तो सपा महागठबंधन के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। वजह यह कि पीएसपी भी यादव व मुसलमान वोटरों में ही सेंध लगाएगी। पीएसपी की बढ़त संभव है बीजेपी को राहत दे।

गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में यादव-मुसलमान वोटरों की अधिकता

गोरखपुर लोकसभा, बांसगांव, सलेमपुर, देवरिया, कुशीनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज, संतकबीरनगर, डुमरियागंज व बस्ती लोकसभा क्षेत्रों में यादव-मुसलमान वोटरों की अच्छी खासी संख्या है। सपा या बसपा इस क्षेत्र में बढ़त इसलिए पाती है क्योंकि सपा यादव मत के साथ मुसलमान वोट तो बसपा भी अपने दलित वोट बैंक के साथ मुसलमानों का वोट पा जाती है। इन दोनों दलों के साथ परम्परागत वोट के साथ मुस्लिम वोट जिसको मिलता है वह दल मुख्य लड़ाई में आ जाता है। ऐसे में अगर पीएसपी भी इसी वोट बैंक में सेंध लगाएगी तो यह बीजेपी की मुश्किलों को थोड़ा कम ही करेगी।

Published on:
22 Nov 2018 10:08 pm
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