निषाद दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद से विशेष बातचीत
गोरखपुर। निषाद दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद ने गोरखपुर संसदीय उपचुनाव के लिए प्रत्याशी तय करने की जिम्मेदारी सपा सुप्रीमो को सौंपने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर इस बार जो गठबंधन किया गया है उसमें हमारा दल छोटे भाई की भूमिका में है। सपा-कांग्रेस जैसे दल बड़े भाई की भूमिका में रहेंगे।
पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि इस उपचुनाव में हमारे दल ने प्रत्याशी चयन का दारोमदार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सौंप दिया है। सपा जिस प्रत्याशी को उतारेगी हम उसके साथ हैं।
अपने पुत्र को सपा उम्मीदवार बनाए जाने के मुद्दे पर डाॅ.संजय निषाद ने कहा कि सामाजिक समीकरणों को देखते हुए समाजवादी पार्टी भी यह चाहती है। उन्होंने बातों ही बातांे में इस नाम पर सहमति बन जाने की ओर भी इशारा किया।
डाॅ.संजय ने बताया कि 2014 में जब वह राजनीति में आए उसके पहले तक निषाद समाज बीजेपी के साथ रहता था। अथक मेहनत के बाद यह समाज अब जागरूक होकर अपने हक के लिए एक हुआ है। गोरखपुर संसदीय क्षेत्र निषाद बाहुल्य क्षेत्र है। बीजेपी के पास यह वोटबैंक था जिसके बल पर वह जीतती रही है लेकिन इस बार स्थिति इसके उलट है। अब निषाद समाज बीजेपी से अलग हो चुका है।
जो शक्ति का केंद्र है उसके पास प्रत्याशी ही नहीं
डाॅ.संजय निषाद ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी की इस समय केंद्र व प्रदेश में सरकार है। वह शक्ति का केंद्र है। फिर भी वह प्रत्याशी तय नहीं कर पा रही। नौ महीने चुनाव लेट हुआ इसका यही कारण है कि बीजेपी के पास जनता के पास जाकर उपलब्धियों के नाम पर जानकारी देने को कुछ है नहीं। उन्होंने कहा कि जो शक्ति का केंद्र है वह इस वक्त शक्तिहीन हो चुका है। मंथन तो विपक्ष या उन लोगों का करना चाहिए जो सत्ता में नहीं हैं। लेकिन यहां उलट है जो सर्वशक्तिमान है उसको सोचना पड़ रहा।
उपचुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और प्रत्याशी कब आएगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने तो बड़े भाइयों पर सबकुछ छोड़ दिया है। बीजेपी को बताना चाहिए कि वह कब अपना प्रत्याशी उतारेगी। उन्होंने कहा कि हम बहुत जल्द अपने प्रत्याशी का ऐलान करेंगे।
क्या यह गठबंधन उपचुनाव के लिए ही है। इस सवाल पर डाॅ.निषाद
ने कहा कि साथ चलने का यह सिलसिला अभी शुरू हुआ है यह 2022 तक चलेगा। इस बीच में कई चुनाव हैं। हम एक होकर एक नए समीकरण के साथ लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस नए सामाजिक समीकरण से राजनीति में आने वाले दिनों में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेगा।