गोरखपुर

जीएसटी का एक सालः कम से कम टैक्स हो तो ही लोगों में होगी स्वीकार्यता

  सबने कहा सकरात्मक परिणाम के लिए कई बदलावों की जरूरत
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Updated: 30 Jun 2018, 5:33 PM IST
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GST जीएसटी का एक सालः कम से कम टैक्स हो तो ही लोगों में होगी स्वीकार्यता

जीएसटी को लागू हुए एक साल पूरे हो गए हैं। जिस क्रांतिकारी परिवर्तन की बात हो रही थी वह एक साल में दिख नहीं सकी है। कुछ लोग इसे लागू करना जनविरोधी मानते हैं जबकि कई लोग जीएसटी के सकारात्मक परिणाम आने में अभी एक से दो साल और इंतजार की बात करते हैं। हालांकि, जीएसटी के विभिन्न टैक्स स्लैब ने तमाम जरूरी सामानों की कीमतों में इजाफा से आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ाया है तो कई व्यापारी मानते हैं कि कागजी कार्रवाई की अधिकता ने उनकी परेशानियों को बढ़ा दिया है।
एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ.राजेश चंद्र मिश्र बताते हैं कि जीएसटी एक साल में फिलहाल कोई बहुत बड़ा चमत्कार नहीं कर पाया है जितना बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था। आम व्यापारियों की परेशानियां बढ़ी हैं। जनता की भी दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। फिलहाल इसमें और सुधार की जरूरत है। डाॅ.मिश्र बताते हैं कि चाणक्य ने कर प्रणाली की व्याख्या की है। राजा को अपनी प्रजा को व्यापार करने का उन्मुक्त वातावरण प्रदान करते हुए कर इस तरह वसूलना चाहिए जैसे मधुमक्खियां विभिन्न फूलों से पराग एकत्र कर शहद का निर्माण करती हैं। वह कहते हैं कि इसका अर्थ यह हुआ कि कर ढांचा इस तरह होना चाहिए किसी को इसे चुकाने में पीड़ा का अनुभव न हो। लेकिन जीएसटी में छह स्लैब में टैक्स है।

इकोनामिक्स और बैंकिंग एक्सपर्ट डीएम झा का कहना है कि जीएसटी देश में सकरात्मक बदलाव लेकर आएगा लेकिन इसका असर फिलहाल नहीं दिखेगा। सकरात्मक परिणाम मिलने में कम से कम डेढ़ से दो साल और लगने हैं। वह कहते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था भी इससे सुधरेगी। थोड़ा-बहुत वित्तीय भार आमजन पर पड़ा है लेकिन कहीं टैक्स बढ़ा है तो तमाम जगहों पर कम भी हुआ है। सबसे अहम यह कि टैक्स चोरी कम होगी।
व्यवसाय क्षेत्र से जुड़े वैभव अग्रवाल बताते हैं कि जीएसटी में अभी सुधार की जरूरत है ताकि छोटे व्यवसायियों को राहत मिल सके। जीएसटी रजिस्ट्रेशन में 20 लाख के टर्नओवर को बढ़ाकर 80 लाख कम से कम करना चाहिए। 50 हजार के माल के लिए जीएसटी नंबर की अनिवार्यता बढ़ाकर कम से कम दो लाख करने की आवश्यकता है।

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