
गोरखपुर। जमीन के विवाद में गलत तरीके से रिपोर्ट देना और उसी के आधार पर कार्रवाई करना जिले के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के लिए भारी मुसीबत बन चुकी है। हाईकोर्ट के आदेश पर दो भाईयों के बीच जमीन के विवाद प्रकरण में एसडीएम सदर, सीओ गोरखनाथ समेत 29 लोगों के खिलाफ बलवा, चोरी समेत विभिन्न गंभीर धाराओं केस दर्ज कर लिया गया है। रपट चिलुआताल थाने में दर्ज की गई है।
याचिकाकर्ता रफीक अहमद ने उच्च न्यायालय में गुहार लगाई थी कि उन्होंने जंगल बेनी माधव नंबर दो में 26 जून 1986 को अपने पैतृक जमीन के पास ही एक जमीन रजिस्ट्री कराई थी। अपने आवास के पास ही लकड़ी का व्यवसाय शुरू किया था। मकान के पास ही एक आरा मशीन लगा ली और खाली जमीन पर खरीदी लकड़ियों को रखा करते थे।
इस जमीन पर रफीक के भाई शब्बीर भी दावा करते रहेे हैं। मामला दीवानी न्यायालय में लंबित था। इसी बीच शब्बीर ने एसडीएम सदर को प्रार्थना देकर घर का रास्ता जमीन से होने का दावा करते हुए खाली कराने की गुहार लगाई। एसडीएम ने नायब तहसीलदार, कानूनगो और हल्का लेखपाल की टीम बनाकर जांच का निर्देश दिया। नायब तहसीलदार शशांक शेखर राय, राजस्व निरीक्षक सुभाष यादव व लेखपाल नंदलाल यादव पर आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रास्ता होने संबंधी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी। इसके बाद एसडीएम सदर ने रास्ता खाली कराने का निर्देश दे दिया। 6 मई को राजस्व विभाग व पुलिस की टीम वहां पहुंची। इनलोगों ने एक पक्ष के लिए जमीन को खाली करवा दिया। आरोप है कि रफीक की इस दौरान काफी लकड़ियों को भी चुरा लिया गया। रफीक बताते हैं कि वह दस्तावेज दिखाते रहे लेकिन पुलिस व राजस्व के लोगों ने उनकी एक न सुनी। इस कार्रवाई के विरोध में रफीक ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने उनकी सुनते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद चिलुआताल थाने में केस दर्ज कर लिया गया है।
ये बनाए गए हैं आरोपीः
एसडीएम सदर नलनीकांत, सीओ गोरखनाथ चारू निगम, नायब तहसीलदार शशांक शेखर राय, लेखपाल, चिलुआताल थानेदार सौरभ राय, बरगदवा चैकी इंचार्ज, एसआई रमेश, एसआई रघुवर पाल, सिपाही जेएन यादव, पूर्व पार्षद भगवान दास, धर्मेंद्र , वीरेंद्र, रविंद्र्र, महेंद्र, शब्बीर अहमद, शहजाद, तौकीर, फिरोज, फिरदौस, शाहरूख, प्रदीप शर्मा, धीरज, मोहम्मद हुसैन, अरशद, चंद्रभान चैधरी, मंटूू, राजेंद्र शर्मा, बब्बू।