
ग्रेटर नोएडा. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी एरिया में 203 ग्राम पंचायतों में चुनाव की आखिरी उम्मीद समाप्त होने के सा थी ही लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। गांवों में जनप्रतिनिधि न होने की वजह से उनकी समस्या कोई सुनने को तैयार नही है। जिन अधिकारियों पर लोगों की समस्या सुलझाने की जिम्मेदारी है, वे लोगों से मिलते ही नहीं है। गांवों में प्रधान न होने की वजह से जन्म, मृत्यू, मूल निवास प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड तक बनने में लोगों के सामने दिक्कतें आ रही है।
गांव का विकास हुआ ठप
स्थानीय चुनाव और जन प्रतिनिधि नहीं होने की वजह से गांवों का विकास भी ठप हो गया है। ज्यादातर गांवों में अथॉरिटी की तरफ से बनाई गई पानी की टंकी और पानी की निकासी की व्यवस्था भी ठप हो गई है। इन्हें देखने वाला कोई नही है। ग्रामीणों की माने तो ग्राम पंचायत चुनाव होना बेहद जरूरी है। चुनाव न होने की स्थिति में अथॉरिटी को अपनी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और अथॉरिटी की तरफ कम से कम सप्ताह में एक दिन ग्रामीणों की समस्या को सुनकर उसका निस्तारण कराए। तभी समस्या हल हो सकती है।
यमुना अथॉरिटी और ग्रेनो अथॉरिटी के अधिकारियों की मांग पर तत्कालीन समाजवादी पार्टी ने ग्राम पंचायत चुनाव पर रोक लगा दी थी। इस मामले में गौतमबुद्धनगर के लोगों ने चुनाव की मांग की थी। इस संबंध में इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने भी सरकार के फैसले को बरकार रखते हुए अथॉरिटी एरिया में चुनाव कराने पर रोक लगा दी थी। लिहाजा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी के 203 गांवों में चुनाव नहीं हुए थे। यूपी में बीजेपी सरकार आाने के बाद लोगों को दौबारा से चुनाव होने की उम्मीद जताई थी। चुनाव की मांग को लेकर ग्रामीण भी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से गुहार लगा चुके हैं। वहीं, दादरी और नोएडा के विधायकों ने भी शासन स्तर पर यह मांग उठाई थी।
यह हो रही है दिक्कत
यूपी के सीएम ने मेरठ के कमिश्नर प्रभात कुमार से चुनाव कराने के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन उन्होंने चुनाव कराने पर रोक लगा दी है। ग्रामीण तेज सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत चुनाव न होने की वजह से ग्राम विकास की रफ्तार थम गई है। गांव में साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ग्रामीणों को राशन मिलने में दिक्कतें हो रही है। राशन डीलर जनप्रतिनिधि न होने की वजह से राशन नहीं दे रहे हैं। तेज सिंह ने बताया कि जो बच्चे गांव में पैदा होते हैं, उनके जन्म प्रमाण-पत्र नहीं बन पा रहे हैं। वहीं, अगर बीमारी के चलते किसी व्यक्ति के मृत्यू गांव में हो जाती है तो उसके परिजनों को मृत्यू प्रमाण-पत्र नहीं बना पाते हैं। वहीं, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी के अधिकारी भी उनकी सुनने को तैयार नही है। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि न होने की वजह से चपरासी अधिकारियों से मिलने नहीं देता है। ऐसे में अथॉरिटी अफसरों के सामने भी अपनी समस्या ग्रामीण नहीं रख पा रहे हैं