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ईरान: संसदीय चुनाव के लिए शुक्रवार को वोटिंग, हिजाब विरोधी कार्यकर्ता ने मतदान का किया बहिष्कार

चुनाव ( Iran Elections 2020 ) से पहले हजारों उम्मीदवारों अयोग्य करार आयतुल्ला अली खामनेई ( Ayatollah Ali Khamenei ) ने लोगों से भारी मतदान करने की अपील
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Feb 20, 2020
shaparak shajarizadeh
shaparak shajarizadeh (File Photo)

तेहरान। ईरान में शुक्रवार को संसदीय चुनाव ( Iran Elections 2020 ) होने वाले हैं उससे पहले विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है और चुनाव का बहिष्कार किया जा रहा है। इसके अलावा चुनाव से पहले हजारों उम्मीदवारों को अयोग्य करार दे दिया गया है।

इसको लेकर अब ईरान की सियासत में मतदान से पहले हलचल तेज हो गई है। उम्मीदवारों को अयोग्य करार दिए जाने के संबंध में सफाई देते हुए ईरान की चुनाव निगरानी संस्था गार्जियन काउंसिल ( Guardian Council ) ने बुधवार को बताया कि देश के कानून के अनुसार ही उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराया गया है। किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं किया गया है।

इन सबके बीच ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली खामनेई ( Iran's Supreme Religious Leader Ayatollah Ali Khamani ) ने लोगों से भारी मतदान करने की अपील है। उन्होंने मतदान को धार्मिक कर्तव्य बताते हुए नागरिकों से कहा कि मतदान में जरूर भाग लें।

हिजाब विरोधी कार्यकर्ता ने मतदान का किया बहिष्कार

आपको बता दें कि ईरान में हिजाब पहनने की अनिवार्यता को लेकर कई महिलाओं ने मोर्चा खोल रखा है और इस कानून को मानने से इनकार किया है। इस बीच हिजाब विरोधी महिला कार्यकर्ताओं ने संसदीय चुनाव का बहिष्कार किया है।

हिजाब विरोधी कार्यकर्ता शापारक शाजारीजादेह ( Shapari Shazarizadeh ) ने संसदीय चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया। महिला अधिकारों के लिए प्रदर्शन करने के दौरान शाजारीजादेह ने सार्वजनिक तौर पर कई बार हिजाब हटाया और उसे परचम बनाकर लहराया, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

जिनेवा में चल रहे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक सालाना सम्मेलन के दौरान 44 वर्षीय शाजारीजादेह ने कहा कि ईरान के लोगों की उम्मीद टूट चुकी है। मैं उन लोगों में से थी जिन्होंने कुछ उम्मीद बांध रखी थी। लेकिन अब तो यह खराब और बेहद खराब में से चुनने जैसा है।

इस दौरान उन्होंने ईरान की राजनीतिक लोगों और व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यहां पर सुधारवादी और मध्यमार्गी लोगों को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया। बता दें कि ईरान के इस्लामिक परिधान के खिलाफ अभियान दिसंबर 2017 में शुरू हुआ था। उस समय माना जाता था कि शाजारीजादेह में परिवर्तन लाने का सामर्थ्य है, लेकिन अब उनकी बातों से लगता है कि अब वह भी हार मान चुकी हैं।

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Updated on:
21 Feb 2020 10:13 am
Published on:
20 Feb 2020 02:34 pm