गुना

किसान ने अपनाई ऐसी तकनीक लागत रह गई आधी, दोगुने दाम पर बिकी उपज

जैविक खेती करने की सलाह दी और शुरुआत में जैविक खाद, अन्य सामग्री प्रदान की। इसे अपनाकर उन्होंने कृषि को लाभ का धंधा बनाया।

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Feb 14, 2022
cost of farming is less, profit is more

गुना. यूं तो खेती हर किसान करता है, लेकिन मध्यप्रदेश के गुना जिले के एक किसान ने जैविक खेती को अपनाया और अन्य किसानों की अपेक्षा अधिक लाभ कमाया है। जैविक खेती से किसान की लागत आधी रह गई, वहीं जब उसने मक्का की फसल उगाई तो वह भी मंडी की अपेक्षा दो गुने दाम पर बिकी।

पारंपरिक खेती में लगातार घाटा होने की वजह से अब अधिकांश किसान जैविक खेती का रुख कर रहे हैं। इस बदलाव से किसानों को कितना फायदा हो रहा है, इसका एक उदाहरण है बमोरी विकासखंड के ग्राम अजरोड़ा के किसान अशोक कुमार नागर हैं, जो जैविक खेती कर अच्छा लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

नागर अपने 2 एकड़ जमीन में जैविक पद्धति अपनाकर कृषि कार्य कर रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके यहां आत्मा परियोजना द्वारा •परंपरागत कृषि विकास योजना अंतर्गत 50 किसानों का जैविक क्लस्टर गठित किया। जैविक खेती करने की सलाह दी और शुरुआत में जैविक खाद, अन्य सामग्री प्रदान की। इसे अपनाकर उन्होंने कृषि को लाभ का धंधा बनाया। नागर बताते हैं कि वह पिछले 03 वर्षों से जैविक पद्धति से खेती कर रहे हैं। इसमें फसल की लागत अन्य किसानों की अपेक्षा आधी रह गई है। उत्पादित माल की कीमत भी अच्छी मिल रही है। नागर के अनुसार कृषि विभाग की आत्मा इकाई के अधिकारियों की सलाह अनुसार उन्होंने अपने यहां जानवरों का उचित प्रबंध कर वर्मी कंपोस्ट इकाई का निर्माण किया है। इससे जैविक खाद गौमूत्र आसानी से प्राप्त हो जाता है।

नागर ने बताया कि वह किसी प्रकार का रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते हैं। उसके स्थान पर वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद का प्रयोग करते हैं। इससे कीट, व्याधि का प्रकोप कम होता हैं और उसके रोकथाम के लिए घर पर ही नीम की पत्ती, धतूरा, आंक आदि से जैविक कीटनाशक बनाकर रोकथाम करते हैं। सभी किसान भाई यूरिया के लिए लाइन में लगते थे, जबकि मैंने गोमूत्र स्प्रे फलल में छिड़ककर यूरिया की पूर्ति की, फसल भी अन्य किसानों की तुलना में कमजोर नहीं रही, वहीं लागत भी २५ हजार रुपए हेक्टेयर की जगह १३ हजार रुपए हेक्टेयर रह गई, वहीं उत्पादन भी पहले से बेहतर हुआ, आत्मा के बीटीएम प्रमोद कुमार श्रीवास्तव से सलाह लेकर 100 ग्राम सर्फ (वाशिंग पाउडर) प्रति पंप में स्प्रे कर इल्ली का नियंत्रण किया। मंडी में मक्का का भाव 1400 रुपए प्रति क्विंटल था, वहीं मेरी मक्का ग्रीन ग्रेन कंपनी भोपाल ने 2600 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदी।

Published on:
14 Feb 2022 12:59 pm