
गुना/झागर. रास्ते में कीचड़ और सिर के ऊपर झूलते बिजली के तार। बच्चों के लिए बनाए आंगनबाड़ी केंद्र में किराएदार का डेरा। गांव में विकास के वादे लेकिन हकीकत में उड़ता मिला योजनाओं का मखौल। ये नजारा है, ग्राम पंचायत रत्नागिर और मुहाल कालोनी का। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम योजनाएं लागू कर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन गांवों में विकास नजर नहीं आ रहा है। गांव में सीसी, खरंजा पर लाखों रुपए निकाले जाते हैं, लेकिन हकीकत में निर्माण नजर नहीं आता है।
ग्राम पंचायत मुहाल कालोनी में तो सरपंच पति ने आंगनवाड़ी केंद्र के नवीन भवन को किराए पर ही दे दिया। ग्राम पंचायत रत्नागिर में सडक़ों पर पानी भरा हुआ है। सडक़ों के ऊपर बिजली के तार झूल रहे हैं। बारिश और गर्मी के मौसम में दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। गांवों में बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं भी ठप पड़ी हैं। जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला पंचायत से लेकर प्रशासन मौन बना हुआ है।
सरपंच पति ने आंगनवाड़ी केंद्र की सरकारी इमारत को किराए पर दे दिया
ग्राम पंचायत मुहाल कालोनी में बनाया गया आंगनवाड़ी केंद्र किराए पर दे दिया है। गांव में पानी की टंकी के नीचे आंगनवाउ़ी संचालित थी, इस वजह से हादसे का भय था। इसके बाद ४ लाख रुपए से ज्यादा राशि खर्च कर नया भवन तैयार कर दिया है। आंगनवाड़ी को एन भवन में शिफ्ट नहीं किया है। आंगनवाड़ी केंद्र को गांव के दूसरे सरकारी भवन में संचालित करा दिया है, लेकिन आंगनवाड़ी के लिए जो भवन है, उसे ५०० रुपए मासिक किराया पर दे दिया है।
गुरुवार को नए भवन की सफाई करती हुई महिला मिली। उनसे जब इस बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बताया, हमनें यह भवन ५०० रुपए किराया पर लिया है। सरपंच पति मदनमोहन धाकड़ से बात की तो उन्होंने बताया, यह भवन उनके द्वारा किराए पर दिया गया है। नया भवन बना है, उसमें बच्चे बीमार हो जाते हैं। उनसे यह पूछा कि सरकारी भवन कैसे किराए पर दे दिया तो वह इस बात को हंसी में टाल गए।
रत्नागिर में पानी का भी संकट, एक ट्यूबवेल है, वह भी सूखने लगा
ग्राम पंचायत रत्नागिर में पानी का संकट गहराने लगा है। जल स्तर नीचे जाने से ग्रामीणों को दूर दूर से पानी लाना पड़ता था। गांव में एक भी हैंडपंप चालू स्थिति में नहीं है। इस कारण ग्रामीणों को ट्यूबवेल से पानी लेने जाना पड़ता है। ग्रामीण ३००-३०० रुपए में पानी लेते हैं, लेकिन अब यह ट्यूबवेल भी सूखना लगा है। उसमें पानी कम हो गया है। गांव में जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने सरपंच को फोन लगाया। सरपंच ने फोन नहीं उठाया तो सचिव से चर्चा की। सचिव को गांव की समस्या बताई तो दूसरे गांव के बारे में बताने लगे। ग्रामीणों ने नल जल योजना के कनेक्शन नहीं हैं। इस पर उन्होंने कहा, यह हमारा काम नहीं है।
पीएचई विभाग जब काम पूरा करके देगा, तो कुछ करेंगे। पंचायतों की समस्याएं बताई तो उन्होंने फोन काट दिया। गांव में स्थित एक स्वास्थ्य केंद्र हैं, वह भी खुलता नहीं है। यहां महीनों से कोई आया नहीं है। केंद्र में भी ताला लटका मिला। ग्रामीणों ने बताया, स्वास्थ्य केंद्र का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता है। कई बार ग्रामीण दवा लेने के लिए जाते हैं, लेकिन उनको कोई नहीं मिलता है। जब कोई जानकारी भी लेता है तो उनको कोई जानकारी नहीं दी जाती है।
शौचालय के नाम पर गड्ढा खोदे
ग्राम रत्नागिर में ही शौचालय के नाम पर गड्ढा खोद दिए गए हैं, लेकिन अब तक निर्माण नहीं हो सका है। गांव में अब तक न तो शौचालयों का निर्माण हो सका है और न ही कोई जानकारी दी गई है। ग्रामीणों ने बताया, यह गड्ढे दिवाली पर खोदे गए थे, लेकिन शौचालय का निर्माण अब तक नहीं कराया। इस कारण से इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। गांव में कई लोगों के यहां गड्ढे खुदे पड़े हैं। उधर, ग्राम पंचायत रत्नागिर के स्कूल के बुरे हाल हैं। ग्रामीणों ने बताया, न तो टायलेट है और न ही पानी की व्यवस्था। परिसर में एक हैंडपंप हैं, वह भी सूखा पड़ा है। इस वजह से ग्रामीणों को दिक्कत हो रही है।