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Guna News: मजबूर मां… प्रसव पीड़ा सहते 3 KM तक पैदल चली, रास्ते में ही देना पड़ा बच्चे को जन्म

Pregnant woman walks: आजादी के 80 साल भी प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरा तरह नहीं पहुंच पाई हैं। गुना में प्रसूता को प्रसव की पीड़ा झेलते हुए पैदल चलकर अस्पताल तक जाना पड़ा।
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Aug 23, 2026
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Pregnant woman walks: एंबुलेंस नहीं मिली अस्पताल तक पैदल चली प्रसूता (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Pregnant woman delivery on road: एक तरफ गांव-गांव बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और एंबुलेंस सेवा के दावे किए जा रहे है, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के गुना जिले के भदौरा ग्राम पंचायत के नेतलपुर गांव में एक प्रसूता को प्रसव पीड़ा के बीच करीब 2 से 3 किलोमीटर तक कच्चे रास्ते पर पैदल चलना पड़ा। हालत यह रही कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते महिला का प्रसव हो गया। परिजनों का आरोप है कि समय पर अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता या एंबुलेंस मिल जाती तो यह स्थिति नहीं बनती।

प्रसव में समय बताकर प्रसूता को स्वास्थ्य केंद्र में नहीं किया भर्ती

परिजनों के मुताबिक शुक्रवार को वे सुमन आदिवासी को प्रसव के लिए भदौरा स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। उनका आरोप है कि वहां मौजूद स्टाफ ने यह कहते हुए महिला को भर्ती नहीं किया कि अभी प्रसव में समय है। परिजनों को यह भी बताया गया कि रात में डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहेंगे। इसके बाद परिवार महिला को वापस घर ले गया। शनिवार सुबह सुमन को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस के लिए फोन किया। आरोप है कि एंबुलेंस सेवा की ओर से बताया गया कि नेतलपुर गांव का रास्ता खराब है, इसलिए वाहन वहां नहीं पहुंच सकता।

मजबूरी में पैदल निकले परिजन

एंबुलेंस नहीं मिलने के बाद परिजनों के पास महिला को पैदल अस्पताल ले जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। प्रसव पीड़ा से जूझ रही सुमन को परिजन कच्चे और खराब रास्ते से पैदल लेकर भदौरा की ओर चल पड़े। करीब 2 से 3 किलोमीटर चलने के दौरान ही रास्ते में महिला का प्रसव हो गया। इसके बाद परिजनों ने किसी तरह निजी वाहन की व्यवस्था की और जच्या-बच्चा को भदौरा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। महिला का यह दूसरा प्रसव बताया जा रहा है।

खराब रास्ता बना समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाने की समस्या नई नहीं है। खराब रास्ते के कारण ग्रामीणों को आए दिन परेशानी उठानी पड़ती है। उनका कहना है कि प्रसव जैसी आपात स्थिति में यदि एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधा समय पर नहीं मिलेगी तो ग्रामीणों के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावे बेमानी साबित होते हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा ये

सुमन आदिवासी को शुक्रवार को भदौरा स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती किया था, लेकिन परिजन प्रसूता को ले गए थे। शनिवार सुबह के घटनाक्रम को लेकर जानकारी ले रहे हैं, परिजनों ने एंबुलेंस का कॉल किया या नहीं? वहीं स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर और स्टाफ भी मौजूद रहता है।- शिल्पा टाटिया, डीएचओ, स्वास्थ्य विभाग

Updated on:
23 Aug 2026 04:04 pm
Published on:
23 Aug 2026 04:04 pm