गुना

6 साल तक चलता रहा ‘खेल’, गुना आजीविका मिशन में करोड़ों का घोटाला, जांच शुरू

Guna Rural Livelihood Mission- गुना आजीविका मिशन में 3.74 करोड़ की घोटाले का खुलासा हुआ है। मामले को लेकर पूर्व डीपीएम, अकाउंटेंट और सहायक वित्त प्रबंधक पर एफआईआर दर्ज।
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Updated: 26 Jun 2026, 8:49 PM IST
Rural Livelihood Mission Scam FIR registered against Former DPM Accountant Assistant Finance Manager
Rural Livelihood Mission Scam- गुना आजीविका मिशन में करोड़ों का घोटाला (फोटो सोर्स- Patrika)

Rural Livelihood Mission Scam- मध्य प्रदेश के गुना जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) में सरकारी धन की अफरा-तफरी और गंभीर वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। स्व-सहायता समूहों के लिए आई 3.74 करोड़ रुपये की राशि को असल हितग्राहियों के बजाय निजी व्यक्तियों और संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इस महाघोटाले में कैंट पुलिस ने राज्य स्तरीय जांच समिति की अनुशंसा पर तत्कालीन जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) सहित तीन मुख्य जिम्मेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पोर्टल के आंकड़ों के मिलान से खुला राज

दरअसल, आजीविका मिशन के तहत गठित स्व-सहायता समूहों के वित्तीय लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड भारत सरकार के लोकोस (LOKOS) पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। मई माह में जब मिशन के वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (FDM) पोर्टल और लोकोस पोर्टल के आंकड़ों का आपस में मिलान किया गया, तो गुना विकासखंड के प्रतिज्ञा सीएलएफ के खातों में 90.25 लाख रुपये की बड़ी विसंगति सामने आई। FDM पोर्टल पर तो यह राशि ट्रांसफर होना दिख रही थी, लेकिन जब बैंक स्टेटमेंट और अभिलेखों को खंगाला गया, तो वहां यह राशि पहुंची ही नहीं थी।

6 साल के खातों की जांच में बढ़ता गया घोटाले का दायरा

इस गड़बड़ी के सामने आते ही जिला पंचायत सीईओ ने तीन सदस्यीय दल गठित कर जांच के आदेश दिए। वहीं राज्य स्तर से भी एक विशेष टीम जांच के लिए गुना पहुंची। शुरुआती जांच में मामला वित्तीय वर्ष 2021-22 का दिखाई दे रहा था, लेकिन जब जांच का दायरा बढ़ाते हुए वर्ष 2019 से लेकर 2025 तक के बैंक खातों और पोर्टल प्रविष्टियों का परीक्षण किया गया, तो यह घोटाला बढ़कर 3 करोड़ 74 लाख रुपये तक पहुंच गया।

तबादले के बाद भी पूर्व डीपीएम के हस्ताक्षरों से होता रहा खेल

जांच रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। तत्कालीन जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) विष्णु पंवार का तबादला 11 फरवरी 2019 को ही राजगढ़ जिले में हो गया था। इसके बावजूद गुना में उनके डिजिटल या भौतिक हस्ताक्षरों का उपयोग कर लगातार वित्तीय लेन-देन को अंजाम दिया जाता रहा। इस पूरे खेल में उनके साथ अकाउंटेंट मनोज जैन और सहायक वित्त प्रबंधक अमित अग्रवाल की भूमिका भी मुख्य रूप से उजागर हुई है।

कैंट थाने में आपराधिक मामला दर्ज

राज्य स्तरीय जांच समिति ने इसे केवल विभागीय लापरवाही न मानते हुए शासकीय धन की सोची-समझी अफरा-तफरी करार दिया और कलेक्टर के माध्यम से पुलिस कार्रवाई की सिफारिश की। समिति ने पंजाब नेशनल बैंक के खातों से हुए सभी लेन-देन और भुगतान की बारीकी से जांच करने को कहा है। गुरुवार को आजीविका मिशन के डीपी कमठान ने कैंट थाने में आवेदन पेश किया, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी अमित अग्रवाल, मनोज जैन और विष्णु पंवार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) (अपराधिक विश्वासघात) के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत कानूनी तफ्तीश शुरू कर दी है।

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26 Jun 2026, 8:49 PM IST
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