एससीएसटी/एट्रोसिटी एक्ट के विरोध में सर्व समाज ने करवाया मुंडन, समाज के लोगों ने आरक्षण को लेकर सरकार पर साधा निशाना
गुना@जावेद खान की रिपोर्ट...
एससीएसटी एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज के सैंकड़ों लोगों ने मंगलवार को मुंडन करवाया कर अपना विरोध जताया। सवर्ण समाज के लोगों ने सुबह से ही शास्त्री पार्क पर पंडाल लगाकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
रघुवंशी समाज के वरिष्ठजन दिनेश रघुवंशी ने जातिवाद व धर्म को लेकर की जा रही राजनीति को गलत बताया। दिनेश रघुवंशी का कहना है कि नीति पर बात नही करते नेता बाल्कि बांटने का काम कर रहे है।
वही अवधेश श्रीवास्तव ने आरक्षण को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार सवर्ण के साथ भेदभाव कर रही है। अवधेश श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार को जल्द ही इस एक्ट में संसोधन करना चाहिए नहीं तो समाज के लोग इस एक्ट के विरोध में अपना अंदोलन तेज करेगें।
अलग अलग तरहा से जता रहे विरोध
एससीएसटी एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज के अलग अलग तरह से अपना विरोध प्रर्दशन कर रहे है। समाज के लोगों का कहना है कि जब तक सरकार एक्ट में संसोधन नहीं करेगी तब तक सवर्ण समाज अपना विरोध प्रदर्शन करता रहेगा।
आज कर सकते है नई पार्टी का ऐलान
सपाक्स ने अपनी राजनीतिक पार्टी और अपनी पार्टी के पदाधिकारियों की घोषणा कर दी है। पार्टी राज्य के 230 विधान सभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
सपाक्स संगठन के संरक्षक रहे हीरालाल त्रिवेदी अब पार्टी अध्यक्ष होंगे। घोषणा के मुताबिक सपाक्स अब संगठन से राजनीतिक दल बन गया है। सपाक्स ने प्रदेश कार्यकारिणी भी बनायी है। इसमें 4 उपाध्यक्ष भी बनाए गए हैं।
मध्यप्रदेश विधानसभा की 230 में से करीब 7० सीटें ऐसी हैं जो जातिगत आधारित हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा रीवा, सतना, ग्वालियर और सीधी में जातिगत समीकरण के आधार पर चुनाव लड़ा जाता है। यहां ब्राह्मण, ठाकुर और पटेल जाति के लोग चुनावी समीकरण बनाते और बिगाड़ते हैं।
मध्यप्रदेश में कुल 5 करोड़ वोटर हैं। इनमें 40 लाख से ज्यादा ब्राह्मण वोटर जिस कारण यह कहा जा सका है कि इस चुनाव में ब्राह्मण फैक्टर मजबूत असर दिखा सकता है। विंध्य, महाकौशल, चंबल और मध्य क्षेत्र की करीब 60 सीटें ऐसी हैं जहां ब्राह्मण सीधा असर डालते हैं।
विधानसभा चुनाव 2013 में प्रदेश में 7 फीसदी से ज्यादा ब्राह्मण वोटों का बिखराव देखने को मिला था। जबकि प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 35 सीटें एसी और 47 सीटें एसटी के लिए आराक्षित हैं। सपाक्स का मुख्य मुद्दा एससी-एसटी एक्ट का विरोध है
ऐसे अगर सपाक्स 230 सीटों पर चुनाव लड़ती है तो उसे 82 आराक्षित सीटों पर भी चुनाव लड़ना है वहीं, एससी-एसटी संगठन सपाक्स के खिलाफ विरोध कर रहे हैं ऐसे में सपाक्स के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।