गुडगाँव

ChatGPT से सीखकर बना रहा था दवा, नकली वेट लॉस इंजेक्शन रैकेट में बड़ा खुलासा, ‘ToneUp’ ब्रांड के नाम से कर रहा था मार्केटिंग

Gurgaon Fake Mounjaro Injection: गुरुग्राम में नकली वेट लॉस इंजेक्शन बनाने वाला अवि शर्मा गिरफ्तार। ChatGPT से सीखा दवा बनाना, 'ToneUp' नाम से बेच रहा था बिना मंजूरी वाले इंजेक्शन।

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Apr 26, 2026
AI फोटो

oneUp Weight Loss Injection Scam:दिल्ली से सटे गुरुग्राम में नकली वेट लॉस इंजेक्शन रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल, पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने फ्लैट में न केवल नामी कंपनियों की नकली दवाएं बना रहा था, बल्कि 'ToneUp' नाम से बिना अनुमति वाले वेट लॉस इंजेक्शन भी तैयार कर उनकी मार्केटिंग कर रहा था। आरोपी को शुक्रवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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ChatGPT और 3D प्रिंटर का खौफनाक इस्तेमाल

जांच में पता चला है कि अवि शर्मा ने दवा बनाने का कोई पेशेवर कोर्स नहीं किया था। उसने ChatGPT का इस्तेमाल करके इंजेक्शन तैयार करने की विधि सीखी थी। पैकेजिंग को असली जैसा दिखाने के लिए वह 3D प्रिंटर का उपयोग कर कार्टन, लेबल और निर्देश पत्र (Leaflets) तैयार करता था। इंजेक्शन के लिए कच्चा माल जैसे पेप्टाइड्स, कार्ट्रिज और इंजेक्शन पेन चीन से ऑनलाइन मंगाए जाते थे।

'ToneUp' इंजेक्शन को लेकर एडवाइजरी जारी

गुरुग्राम के ड्रग कंट्रोल ऑफिसर अमनदीप चौहान ने बताया कि आरोपी के फ्लैट से 'ToneUp' इंजेक्शन की भारी मात्रा में पैकेजिंग सामग्री बरामद हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ब्रांड को हरियाणा या केंद्र सरकार की ओर से कोई मंजूरी नहीं मिली है। प्रशासन ने जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है कि 'ToneUp' नाम से बिकने वाला कोई भी उत्पाद न खरीदें, क्योंकि इसे बेहद असुरक्षित और अस्वच्छ परिस्थितियों में बनाया गया था।

2 करोड़ रुपये महीना कमाने का था लक्ष्य

पुलिस के अनुसार, अवि शर्मा साल 2016 तक अपने पिता की फर्म में काम करता था। इस महीने की शुरुआत में उसने अपने गुरुग्राम वाले फ्लैट से यह अवैध कारोबार शुरू किया। उसका लक्ष्य इस धंधे से हर महीने 2 करोड़ रुपये कमाना था। वह डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले मशहूर इंजेक्शन 'माउंजारो' की नकली कॉपी बना रहा था, जिसे दिग्गज फार्मा कंपनी एली लिली (Eli Lilly) बनाती है।

दिल्ली-हैदराबाद तक फैला जाल

ड्रग कंट्रोल विभाग ने अब तक दिल्ली में डिलीवर किए गए चार नकली माउंजारो इंजेक्शन वापस मंगवाए हैं। वहीं, हैदराबाद के अधिकारियों को भी ऐसी खेप जब्त करने या वापस भेजने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अब सोमवार तक उन सभी ऑर्डर्स की लिस्ट तैयार कर लेगी जो मोबाइल के जरिए बुक किए गए थे, ताकि उन्हें बाजार से वापस लिया जा सके।

कैसे फूटा भंडा?

इस गिरोह का पर्दाफाश 18 अप्रैल को हुआ था, जब डीएलएफ फेज-IV में एक कैब को रोका गया। ड्राइवर मुजम्मिल खान ने खुद को मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव बताते हुए कहा कि वह अवि शर्मा द्वारा सप्लाई किया गया स्टॉक ले जा रहा है। तलाशी में 56 लाख रुपये से अधिक के नकली इंजेक्शन बरामद हुए, जिसके बाद पुलिस अवि के फ्लैट तक पहुंची।

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Published on:
26 Apr 2026 12:11 pm
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