
नई दिल्ली। कांग्रेस लोकसभा और विधानसभा सीटों में महिला आरक्षण में ओबीसी के लिए खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस की ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल ने प्रस्ताव पारित किया है कि जब भी महिला आरक्षण का बिल संसद में आए तो उसमें ओबीसी के लिए कोटे के अंदर कोटा तय होना चाहिए।
कांग्रेस की ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल की बैठक वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई। बैठक में जितनी आबादी उतना हक मिलने पर चर्चा हुई। इसके लिए देश में पहले जातिगत जनगणना हो, सबकी गिनती हो, फिर इसके हिसाब से परिसीमन हो। तब महिला आरक्षण बिल लाना चाहिए। ओबीसी कांग्रेस के राष्ट्रीय चेयरपर्सन अनिल जयहिंद ने बताया कि मोदी सरकार की ओर से लाए गए महिला आरक्षण बिल में ओबीसी महिलाओं के जिक्र नहीं होने की आलोचना की गई। जबकि देश में ओबीसी की आबादी करीब 60 प्रतिशत है। इस मुद्दे पर हमने बिल्कुल सही स्टैंड लिया है।
कांग्रेस नेतृत्व का साफ कहना है कि महिला आरक्षण बिल में ओबीसी माताओं-बहनों को जगह देनी होगी। इस मुद्दे को हम देश भर में लेकर जाएंगे और बताएंगे कि मोदी सरकार ओबीसी महिलाओं को आरक्षण से बाहर रखना चाहती है। मोदी सरकार ये बिल महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन करवाने के लिए लाई थी। बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, पूर्व सीएम अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, बीके हरिप्रसाद सहित बड़े नेता शामिल हुए।
बैठक के बाद गहलोत ने पत्रकारों को बताया कि यह पहली बार है जब राहुल गांधी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बारे में खुलकर बोल रहे हैं। राहुल का यह संदेश गांवों तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मामले में प्रधानमंत्री स्वयं देश भर में घूमकर की महिला आरक्षण का केप्टेन बनते फिर रहे हैं। जबकि महिला आरक्षण की शुरुआत सबसे पहले राजीव गांधी ने की थी। उनकी वजह से आज 20 लाख महिला जनप्रतिनिधि है। इसके बाद सोनिया गांधी ने लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर पहल की। महिला आरक्षण का एजेंडा कांग्रेस का है। यह आज हमें महिला विरोधी बता रहे हैं। कांग्रेस के एजेंडे के आगे उनके एजेंडे विफल हो जाएंगे।
Published on:
23 Apr 2026 11:16 am
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