अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है...
(पत्रिका ब्यूरो,गुवाहाटी): चीन से जल प्रलय से अरुणाचल प्रदेश और असम के निचले इलाकों में खतरा पैदा हो गया है। दरअसल, तिब्बत में बड़े भूस्खलन की वजह से क्षेत्र की एक प्रमुख नदी यारलुंग सांग्पो का बहाव प्रभावित हुआ है। भूस्खलन से नदी में पत्थर व मिट्टी इकट्ठा हो गई है। यारलुंग सांगपो नदी को तिब्बत से अरुणाचल में प्रवेश के बाद सियांग कहा जाता है। यही सियांग असम में प्रवेश के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है। भूस्खलन से तिब्बत के इलाके में कृत्रिम झील बन गई है। चीनी इमर्जेंसी सर्विसेज ने बताया है कि उसने भूस्खलन के बाद यहां से करीब 6,000 लोगों को सुरक्षित बचाया है। अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश की सीमा चीन के तिब्बत से लगी हुई है। चीन में भूस्खलन से नीचे की तरफ ब्रह्मपुत्र नद के पानी का बहाव प्रभावित हुआ है। अरुणाचल से कांग्रेस के सांसद निनोंग एरिंग ने चिट्ठी लिखकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और जल संसाधन राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। सासंद के मुताबिक चीन में 16 अक्टूबर को आए भूस्खलन की वजह से ब्रह्मपुत्र
नद के प्रभाव में रुकावट आई है।
चीन में हुए भूस्खलन की वजह से नदी के बहाव पर बांध की तरह का अवरोधक बन गया है। चीन के मुताबिक मेनलिंग काउंटी में एक गांव के पास हुए भूस्खलन के बाद झील के पानी के स्तर में 40 मीटर का इजाफा हुआ है। यह कृत्रिम झील अब भारत के लिए खतरा बनी हुई है। अरुणाचल के ईस्ट सियांग जिले में प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे जाने से मना किया है।
पूर्वी सियांग के जिला उपायुक्त डुली कामडुक ने बताया कि हमें केंद्रीय जल आयोग से तिब्बत में भूस्खलन की खबर मिली। अरुणाचल के तूतिंग इलाके में सियांग नदी का जलस्तर दो मीटर तक घट गया है। जब चीन की तरफ से बाधा को हटाया जाएगा तो नदी के जल स्तर में अप्रत्याशित वृद्धि से तबाही आ सकती है। जून 2000 में कुछ ऐसा ही हुआ था जब ब्रह्मपुत्र नदी में चीन की तरफ से अचानक पानी छोड़ने की वजह से अरुणाचल प्रदेश में काफी नुकसान हुआ था। अपर सियांग जिले के डिप्टी कमिश्नर डुली कामडुक ने भी बताया कि हमें केंद्रीय जल आयोग से तिब्बत में भूस्खलन की खबर मिली। अरुणाचल के तूतिंग इलाके में सियांग नदी का जलस्तर दो मीटर तक घट गया है।
सांसद एरिंग के मुताबिक कि तूतिंग, यिंगकियोंग और पासीघाट के पास स्थिति गंभीर हो गई है। चीन में ब्रह्मपुत्र नदी की बाधा की वजह से ये इलाके सूख रहे हैं। इसलिए केंद्र को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। सांसद ने सरकार से कहा है कि चीन के पास अगर इस मामले में कोई नई जानकारी है तो उन्हें हमसे समय पर साझा करना होगा। इसके लिए सरकार को सक्रिय हो जाना चाहिए। उन्होंने आगे लिखा है कि इन निचले इलाकों में नदियां तेजी से सूख रही हैं। उन्होंने कहा कि निचले भागों में बसे लोगों के लिए यह जीवन का सवाल है।