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असम में नागरिकता जांच का बड़ा अभियान: सोनितपुर-बारपेटा में सबसे ज्यादा डी-वोटर्स, 1,679 लोगों को भेजा गया बांग्लादेश

Assam D Voters: असम में नागरिकता जांच का मुद्दा फिर चर्चा में है। सरकार ने विधानसभा में बताया कि राज्य में 91 हजार से ज्यादा डी-वोटर्स दर्ज हैं और पिछले दो साल में 1,679 लोगों को कानूनी प्रक्रिया के बाद वापस भेजा गया है। जानिए सोनितपुर और बारपेटा में सबसे ज्यादा डी-वोटर्स की कहानी।
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Assam citizenship issue

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा में 'डी-वोटर' की जानकारी दी। फोटो सोर्स-ANI

Assam citizenship issue: असम में नागरिकता की जांच और अवैध प्रवासियों की पहचान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। विधानसभा में सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों से पता चला है कि राज्य में अभी भी हजारों लोगों की नागरिकता जांच के दायरे में है। वहीं, सरकार ने बताया है कि पिछले दो साल में कानूनी प्रक्रिया के बाद 1,679 लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा में बताया कि राज्य की मतदाता सूची में इस समय 91,385 ऐसे मतदाता दर्ज हैं, जिन्हें 'डी-वोटर' यानी संदिग्ध नागरिकता वाले मतदाता माना गया है। इन लोगों की नागरिकता को लेकर संबंधित प्रक्रिया चल रही है।

इन दो जिलों में सबसे ज्यादा संदिग्ध मतदाता

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, डी-वोटर्स की सबसे ज्यादा संख्या सोनितपुर जिले में है, जहां 13,719 लोग इस श्रेणी में आते हैं। इसके बाद बारपेटा जिले का नंबर है, जहां 8,081 डी-वोटर्स दर्ज हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि डी-वोटर्स और विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए राज्य में विदेशी न्यायाधिकरण (फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल) काम कर रहे हैं। अब तक 56,728 लोगों को इन न्यायाधिकरणों ने विदेशी घोषित किया है। वहीं, 831 लोगों के मामले में ऊपरी अदालतों में भी फैसला आ चुका है।

कानूनी प्रक्रिया के बाद कार्रवाई

विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो साल में 1,679 लोगों को असम से वापस भेजा गया। इनमें 193 ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्हें विदेशी न्यायाधिकरणों ने विदेशी घोषित किया था। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद की गई।

असम सरकार के अनुसार, लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया 1950 के इमिग्रेंट्स एक्सपल्शन एक्ट के तहत की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मामलों में अदालत में सुनवाई जारी है या अपील लंबित है, उन लोगों को वापस नहीं भेजा गया है।

नागरिकता जांच को लेकर बढ़ी चर्चा

असम में नागरिकता का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। राज्य में अवैध घुसपैठ, मतदाता सूची में संदिग्ध नाम और नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है।

विधानसभा में सामने आए नए आंकड़े यह दिखाते हैं कि असम में नागरिकता जांच की प्रक्रिया अभी भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। एक तरफ सरकार अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को जरूरी बता रही है, वहीं दूसरी तरफ नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया भी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

गौरतलब है कि डी-वोटर ऐसे लोगों को कहा जाता है, जिनकी नागरिकता को लेकर किसी वजह से सवाल उठे हों। ऐसे मामलों की जांच तय प्रक्रिया के तहत की जाती है और संबंधित व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने का मौका दिया जाता है।

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