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असम विधानसभा में हंगामा: पीठ पर ‘बाढ़’ का दर्द, बदन पर लाइफ जैकेट, अखिल गोगोई का अनोखा विरोध

Akhil Gogoi Life Jacket Protest: असम विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन अखिल गोगोई लाइफ जैकेट पहनकर बाढ़ और जलभराव की समस्या के खिलाफ विरोध करते नजर आए।
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Akhil Gogoi

असम विधानसभा में अखिल गोगोई का विरोध प्रदर्शन (ANI)

Assam Assembly Budget Session: असम विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन राज्य की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब जोरा दल के विधायक अखिल गोगोई ने बाढ़ और जलभराव की गंभीर समस्या के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। विधायक ने लाइफ जैकेट पहनकर विधानसभा परिसर में प्रवेश किया और सरकार की तैयारियों तथा दावों पर सीधा सवाल खड़ा किया।

2016 के वादों पर उठाए सवाल

विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिल गोगोई ने कहा कि वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने दावा किया था कि गुवाहाटी में कृत्रिम जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। हालांकि, उनके अनुसार, एक दशक बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई समग्र और प्रभावी परियोजना शुरू नहीं की गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल मानसून के दौरान गुवाहाटी सहित कई शहरों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो जाती है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शिवसागर की ड्रेनेज व्यवस्था पर भी नाराजगी

अखिल गोगोई ने अपने गृह जिले शिवसागर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी जल निकासी की समस्या सालों से जस की तस बनी हुई है। उन्होंने बताया कि शहर में आज तक एक प्रभावी और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर वह अब तक पांच बार संबंधित अधिकारियों और सरकार को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली।

विधानसभा में प्रतीकात्मक विरोध बना चर्चा का विषय

बजट सत्र के पहले दिन लाइफ जैकेट पहनकर विधानसभा पहुंचना पूरे सदन और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। इस प्रतीकात्मक विरोध के जरिए उन्होंने राज्य सरकार का ध्यान बाढ़ प्रबंधन, शहरी जलभराव और जल निकासी व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की।

हर साल दोहराती समस्या पर सवाल

विधायक ने स्पष्ट कहा कि असम में हर वर्ष बाढ़ और जलभराव की समस्या दोहराई जाती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में सरकार की ओर से अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक ठोस नीति और प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक आम जनता को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता रहेगा।