ग्वालियर

38 माह, 43 सुनवाई… लैंडफिल साइट जस की तस, आधे शहर में कचरा व्यवस्था बेपटरी

ग्वालियर. शहर की सफाई व्यवस्था और लैंडफिल साइट पर जमा कचरे को हटाने के लिए दायर जनहित याचिका पर 38 महीनों में 43 सुनवाई हो चुकी हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। हाईकोर्ट की लगातार सख्ती और निर्देशों के बावजूद नगर निगम न तो लैंडफिल साइट से कचरा हटा पाया है और […]

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Mar 18, 2026

ग्वालियर. शहर की सफाई व्यवस्था और लैंडफिल साइट पर जमा कचरे को हटाने के लिए दायर जनहित याचिका पर 38 महीनों में 43 सुनवाई हो चुकी हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। हाईकोर्ट की लगातार सख्ती और निर्देशों के बावजूद नगर निगम न तो लैंडफिल साइट से कचरा हटा पाया है और न ही शहर के सभी वार्डों में नियमित कचरा उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित कर सका है। स्थिति यह है कि निगम अब तक केवल रिपोर्ट पेश कर फाइल का आकार बढ़ाता रहा, जबकि जमीन पर सुधार न के बराबर दिखा।

2023 से चल रही है लड़ाई, नतीजा शून्य

जनहित याचिका जनवरी 2023 में सरताज ङ्क्षसह द्वारा दायर की गई थी। मांग थी कि शहर की सफाई व्यवस्था सुधारी जाए और लैंडफिल साइट पर जमा हजारों टन कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जाए। कोर्ट ने समय-समय पर कड़े निर्देश दिए, अधिकारियों को जवाबदेह बनाया और निगरानी के लिए दो न्यायमित्र भी नियुक्त किए, लेकिन ठोस बदलाव अब तक नहीं दिखा।

इंदौर मॉडल की चर्चा, अमल कहीं नहीं

तीन वर्षों में कई बार इंदौर मॉडल का जिक्र हुआ। ग्वालियर से टीमें इंदौर भेजी गईं और वहां से विशेषज्ञ भी आए। सुझाव दिए गए, योजनाएं बनीं, लेकिन अमल नहीं हो सका।

अहम सुनवाई में क्या सामने आया

  • 17 फरवरी 2026: कोर्ट ने निगम आयुक्त से कचरा प्रबंधन पर हुए खर्च और कार्रवाई का विस्तृत हलफनामा मांगा। जरूरत पडऩे पर डबल शिफ्ट में काम कराने के निर्देश दिए और नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव को तलब किया।
  • 20 जनवरी 2026: संसाधनों की भारी कमी उजागर हुई। आधे से भी कम वार्डों में नियमित कचरा उठाव पाया गया।
  • 17 दिसंबर 2025: इंदौर मॉडल की रिपोर्ट पेश हुई, लेकिन पर्यावरण और वन अनुमति के कारण प्रोजेक्ट अटके मिले। कोर्ट ने देरी पर नाराजगी जताई।
  • 2 दिसंबर 2025: निगम की आर्थिक कमजोरी सामने आई। कोर्ट ने सीएसआर, प्रॉपर्टी टैक्स और जनसहयोग से फंड जुटाने का सुझाव दिया।

जमीनी हकीकत आधा शहर भी कवर नहीं

हाईकोर्ट में पेश रिपोर्टों और सुनवाई के दौरान सामने आया कि शहर में 600 वाहनों की जरूरत, लेकिन केवल 240 से काम हो रहा है। 66 में से सिर्फ 36 वार्ड ही कवर हो पा रहे हैं, 30 वार्डों में नियमित कचरा उठाव नहीं, यानी शहर का बड़ा हिस्सा अब भी बदहाल सफाई व्यवस्था से जूझ रहा है।

एक्सपर्ट

नगर निगम के काम ऐसे हैं कि सिर्फ कागजों में सफाई दिखा रहे हैं। कई सलाहकार नियुक्त कर लिए हैं, जिन्हें सिर्फ भुगतान किया जा रहा है। सफाई में कोई बदलाव नहीं हुआ है, स्थिति जस की तस है, अधिकारी काम करना नहीं चाहते हैं।
सुनील जैन, न्यायमित्र

Published on:
18 Mar 2026 05:55 pm
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