ग्वालियर

5000 करोड़ के ‘सहारा चिटफंड कांड’ में सख्त एक्शन, 12 डायरेक्टर भगोड़ा घोषित

Sahara Chitfund Scam: सहारा समूह की क्रेडिट सोसायटियों के खिलाफ बड़ा एक्शन हुआ है। निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने 12 डायरेक्टरों को भगोड़ा घोषित कर दिया।

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Feb 13, 2026
12 Directors Declared Absconders in Sahara Chitfund Scam (फोटो- ANI)

MP News: निवेशकों का फंसा रुपया नहीं लौटाने और आयोग के समक्ष पेश नहीं होने पर ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने सहारा क्रेडिट सोसायटी व स्टार मल्टीपरपज क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के 12 डायरेक्टरों को भगोड़ा घोषित (12 Directors Declared Absconders) कर दिया है। आयोग ने इनके नामों की सूची चस्पा कर दी है।

इन डायरेक्टरों में से दो रांची, नौ लखनऊ और एक हैदराबाद का रहने वाला पुलिस ने आयोग को लिखित में बताया कि आरोपी डायरेक्टर लगातार फरार हैं। उनकी कई स्थानों पर तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद आयोग ने सभी को स्थायी फरार घोषित करने की कार्रवाई की।

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न तो जवाब, न हाजिरी, न भुगतान

आयोग में चल रहे मामलों में डायरेक्टर न तो जवाब पेश कर रहे थे और न ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो रहे थे। सिर्फ वकील पेश हो रहे थे। आयोग द्वारा वारंट जारी किए जाने के बाद भी हाजिरी नहीं दी गई, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाया गया।

धन दुगना करने का लालच, पॉलिसी पूरी फिर भी पैसा नहीं

दरअसल, सहारा समूह की अलग-अलग क्रेडिट सोसायटियों ने अंचल में बड़े पैमाने पर चिटफंड कारोबार (Sahara Chitfund Scam) किया। निवेशकों को धन दोगुना करने का लालच देकर भारी निवेश कराया गया। पॉलिसी अवधि पूरी होने के बावजूद जब राशि नहीं मिली तो निवेशकों ने आयोग की शरण ली। आयोग ने मामलों में 45 दिन के भीतर राशि लौटाने के आदेश दिए, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद निवेशकों की ओर से अधिवक्ता सत्या शर्मा ने वसूली की कार्रवाई के लिए आवेदन किया।

इन डायरेक्टरों को घोषित किया भगोड़ा

प्रशांत वर्मा, अंजुलता रांची, अरविंद उपाध्याय, प्रलय कुमार, वीरेंद्र कुमार, सुधीर कुमार, पूजा शर्मा, संजय कुमार, डीके श्रीवास्तव, देवेंद्र कुमार, लखनऊ, रेनू सेन हैदराबाद को भगोड़ा घोषित किया गया है।

क्या है पूरा विवाद

सहारा की चार कंपनियों ने ग्वालियर सहित अंचल में चिटफंड कारोबार किया, करीब 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश कराया गया। पॉलिसी अवधि पूरी होने के बाद भी निवेशकों को पैसा नहीं मिला। आयोग में करीब 500 केस लंबित हैं। निवेशकों को भुगतान के लिए सेबी का पोर्टल भी बनाया गया, लेकिन वहां से भी राशि नहीं मिली। जिन मामलों में आदेश हो चुके हैं, उनमें सहारा को ब्याज सहित भुगतान करना है।

इन कंपनियों ने किया था कारोबार

  • सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी।
  • स्टार्स मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसायटी।
  • सहारायन मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसायटी।
  • सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट रेंज प्राइवेट लिमिटेड। (MP News)

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Published on:
13 Feb 2026 01:27 am
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