
ग्वालियर. कृषि के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए ग्वालियर से एक बेहद सुखद और राहत भरी खबर आई है। ग्वालियर स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र द्वारा प्रदेश के पांच चुङ्क्षनदा जिलों के किसानों को उन्नत किस्म का आलू बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य शासन के कृषि रोड मैप के तहत आगामी रबी सीजन (अक्टूबर-नवंबर की बुवाई) के लिए कुल 600 क्विंटल उन्नत बीज देने की पूरी तैयारी कर ली गई है। अनुसंधान केंद्र की इस पहल से न केवल आलू की पैदावार में कई गुना इजाफा होगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी यह मील का पत्थर साबित होगा।
योजना के तहत प्रदेश के पांच जिलों- देवास, शिवपुरी, टीकमगढ़, पन्ना और सागर का चयन किया गया है। इन जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों को बीजों के सुरक्षित भंडारण और किसानों तक न्यायसंगत वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्थानीय जलवायु के अनुकूल सबसे बेहतरीन बीज समय पर किसानों को मिल सके, इसके लिए कृषि विभाग पूरी मुस्तैदी से जुट गया है।
अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने इस बार रोग प्रतिरोधक क्षमता और बंपर पैदावार देने वाली तीन प्रमुख किस्मों का चयन किया है।
ग्वालियर के केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित बीजों की गुणवत्ता की साख सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़) में भी रही है। यहां के बीज बंपर उत्पादन के लिए सराहे जाते हैं।
बुवाई के समय किसानों को बीज के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। कृषि विज्ञान केंद्र इन उच्च गुणवत्ता वाले बीजों को तत्काल कोल्ड स्टोरेज में रखेंगे। किसान अक्टूबर-नवंबर में बुवाई के ठीक समय पर कोल्ड स्टोरेज से सही स्थिति में बीज प्राप्त कर सकेंगे। किसान इस फसल से पैदा होने वाले आलू को अगली फसल के लिए भी बीज के रूप में उपयोग कर सकेंगे।
प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों के कृषि विज्ञान केंद्रों में 600 ङ्क्षक्वटल उन्नत आलू बीज भेजने की प्लाङ्क्षनग पूरी हो चुकी है। रबी सीजन में बुवाई के लिए यह बीज किसानों को समय पर मिल जाएगा। ये उन्नत किस्में आलू उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में बेहद मददगार साबित होंगी।
डॉ. सुभाष कटारे, केंद्र प्रमुख, केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र, ग्वालियर