
ग्वालियर. उपनगरीय इलाकों और तंग गलियों के खेल मैदानों से अब ऐसी कहानियां निकल रही हैं, जो सीधे सात समंदर पार जाकर लैंड कर रही हैं। यह कहानी उन माता-पिता की है, जिन्होंने पूरी उम्र सिर्फ ग्वालियर के रेलवे स्टेशन से दिल्ली या मुंबई जाने वाली ट्रेनों को हसरत भरी निगाहों से देखा था और कभी इंटरनेशनल फ्लाइट में बैठने का सपना भी नहीं बुना था। लेकिन आज, उनके घर के आंगन में खेलकूद कर बड़े हुए बच्चे अपनी मेहनत और स्पोर्ट्स कोटे के दम पर न सिर्फ खुद आसमान छू रहे हैं, बल्कि अपने बुजुर्ग माता-पिता को भी पासपोर्ट बनवाकर विदेश की सैर करा रहे हैं। महाराज बाड़ा स्थित डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पिछले तीन साल में खेलों के दम पर सरहद लांघने वाले जांबाजों की संख्या में 20 फीसदी का उछाल आया है। जानकारों और खेल प्रेमियों का मानना है कि ग्वालियर के बच्चों में खेलों को लेकर जो नया जुनून पैदा हुआ है, उससे अगले साल यह 20 फीसदी का आंकड़ा और भी बड़ा होने वाला है। जानकार इसे अच्छा संकेत मान रहे हैं।
क्रिकेट-हॉकी का दबदबा, दूसरे खेल भी नहीं पीछे
अगर खेलों के लिहाज से इस उड़ान का वर्गीकरण करें, तो ग्वालियर की रगों में दौड़ने वाली हॉकी और क्रिकेट का जलवा सबसे ऊपर है। विदेश यात्रा का पासपोर्ट बनवाने वाले खिलाड़ियों में इन दोनों ही खेलों के दिग्गजों की हिस्सेदारी 7-7 प्रतिशत है। वहीं, एथलेटिक्स, बैड मिंटन और कुश्ती जैसे दूसरे खेलों के जांबाज भी 6 प्रतिशत की रफ्तार के साथ दुनिया नापने के लिए तैयार खड़े हैं।
तीन साल का ग्राफ : मैदान से आसमान तक का सफर
ग्वालियर के खिलाड़ी अब सिर्फ घरेलू मैदानों पर चौके-छक्के या गोल नहीं दाग रहे, बल्कि सीधे विदेशी धरती पर देश का झंडा गाड़ रहे हैं। जरा पिछले तीन वर्षों के इन दिलचस्प और बढ़ते आंकड़ों पर नजर डालिए
वर्ष 2024 : इस साल ग्वालियर के 55 होनहार बच्चे अपने माता-पिता की उंगली थामकर पहली बार विदेशी जमीन पर उतरे। ग्राफ में 5 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई।
वर्ष 2025 : खेल का जादू और बढ़ा और यह संख्या सीधे 95 बच्चों तक पहुंच गई। रिकॉर्ड में सीधी 10 फीसदी की छलांग देखी गई।
वर्ष 2026 (अब तक) : इस साल ने तो पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। साल के छह महीने भी नहीं बीते हैं और अब तक 125 बच्चे अपने माता-पिता के साथ विदेश उड़ान भर चुके हैं, जो 20% की मारक बढ़त को दर्शाता है।
एक्सपर्ट व्यू
सपनों को मिल रहे हैं पर, माता पिता की आंखें हो रही हैं नम
महाराज बाड़ा पासपोर्ट सेवा केंद्र में स्पोर्ट्स कोटे के तहत आवेदन करने वाले युवा खिलाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इस बदलते ट्रेंड की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब दिखती है, जब वेरिफिकेशन के समय बच्चों के साथ आए माता-पिता की आंखें गर्व से नम हो जाती हैं। खेल नियमों के कारण कई बार परिजनों को भी साथ जाने का मौका मिलता है। जिस पासपोर्ट दफ्तर में कभी सिर्फ अमीर या नौकरीपेशा लोग आते थे, आज वहां आम परिवारों के खिलाड़ी बच्चे माता-पिता का हाथ थामे इंटरनेशनल फ्लाइट का सपना लिए पहुंच रहे हैं। यह ग्वालियर के बदलते और सकारात्मक मिजाज की एक बेहद भावुक तस्वीर है।
एमएस लोधी, पोस्ट मास्टर, महाराज बाड़ा मुख्य डाकघर