
ग्वायिर के सरकारी अस्पतालों में टिटनेस का इंजेक्शन नहीं, मरीजों को बाहर से खरीदना पड़ रहा
ग्वालियर. शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों के बीच सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में है। जिला अस्पताल मुरार और सिविल अस्पताल हजीरा में डॉग बाइट के मरीजों को रैबीज का इंजेक्शन तो मुफ्त लगाया जा रहा है, लेकिन टिटनेस का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाहर से खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में मुफ्त इलाज के सरकारी दावों की हकीकत सामने आ रही है। डॉक्टर मरीजों को मेडिकल स्टोर की पर्ची देकर टिटनेस का इंजेक्शन खरीदने की सलाह दे रहे हैं।
जेएच में स्टॉक, तो वहां जा रहे कई मरीज
दूसरी ओर अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) में टिटनेस के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और मरीजों को मुफ्त लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि जिला और सिविल अस्पताल से कई मरीज इलाज कराने के लिए जेएएच पहुंच रहे हैं।
लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट के केस
अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार शहर में डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रतिदिन 250 से अधिक मरीज रैबीज और टिटनेस के टीके लगवाने सरकारी अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें 50 से ज्यादा नए मरीज होते हैं। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद जिला और सिविल अस्पताल में टिटनेस जैसे बुनियादी इंजेक्शन का स्टॉक नहीं होना स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं।
रैबीज का तो लगा दिया, टिटनेस का बाहर से लाने को कहा
&कुत्ते के काटने के बाद घबराकर हम जिला अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने रैबीज का इंजेक्शन तो लगा दिया, लेकिन कहा कि टिटनेस का इंजेक्शन अस्पताल में नहीं है, इसे बाहर से खरीदकर लाओ। सरकारी अस्पताल में भी अगर जेब से पैसे खर्च करने पड़ें, तो गरीब मरीज कहां जाएगा।
मनोरमा देवी, निवासी कुम्हारपुरा
&अस्पतालों में रैबीज के इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। अगर मरीजों को टिटनेस का इंजेक्शन बाहर से लाना पड़ रहा है, तो इसके कारणों का पता किया जाएगा। हमारे पास टिटनेस की पर्याप्त सप्लाई आती है, फिर यहां बाहर से क्यों इसे मंगाया जा रहा है। इस व्यवस्था में जल्द ही सुधार किया जाएगा। डॉ. सीमा जायसवाल, सिविल सर्जन
Updated on:
02 Jul 2026 06:46 pm
Published on:
02 Jul 2026 06:41 pm
