आज के दौर में जहां बेटों की चाहत में लोग अक्सर बेटियों के जन्म पर खामोश हो जाते हैं, वहीं ग्वालियर के सफायर होम में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने समाज की पुरानी सोच पर करारा प्रहार किया है। जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष राकेश यादव के घर खुशियों ने दस्तक दी, तो उसका […]
आज के दौर में जहां बेटों की चाहत में लोग अक्सर बेटियों के जन्म पर खामोश हो जाते हैं, वहीं ग्वालियर के सफायर होम में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने समाज की पुरानी सोच पर करारा प्रहार किया है। जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष राकेश यादव के घर खुशियों ने दस्तक दी, तो उसका जश्न किसी राजशाही उत्सव से कम नहीं था।
शानदार काफिला और शाही अंदाज
पुत्र मानवेन्द्र सिंह को जब पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई, तो परिवार ने तय किया कि बिटिया का स्वागत किसी ऐतिहासिक उत्सव की तरह होगा। 4 अप्रेल को जन्मी इस नन्ही परी का गृह प्रवेश इतना जोरदार था कि पूरा इलाका वाह-वाह कर उठा। गाडिय़ों के काफिले पर गर्व से लिखा था— बेटी हुई है…
फूलों की बारिश और रोली के पद-चिह्न
बैंड-बाजे की मधुर धुन और ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच जब बिटिया घर पहुंची, तो आसमान से फूलों की वर्षा की गई। घर को दुल्हन की तरह गुब्बारों और रोशनी से सजाया गया था। लेकिन सबसे भावुक पल तब था, जब बिटिया के नन्हे पैरों में रोली लगाकर सफेद कपड़े पर उसके पद-चिह्न उतारे गए, मानो साक्षात देवी लक्ष्मी ने घर में कदम रखा हो।
समाज के लिए एक सशक्त संदेश
पूरा परिवार और रिश्तेदार खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। इस मौके पर मानवेन्द्र सिंह-दीपिका यादव ने कहा कि यह सिर्फ हमारे घर का उत्सव नहीं, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश है। आने वाला कल बेटियों का है और उनकी पहचान से ही हमारा अस्तित्व है। उनका यह भी कहना है कि आज बेटा और बेटी दोनों ही बराबर हैं, उनमें किसी तरह का कोई अंतर नहीं है। वर्तमान में बेटियों बेटों से भी बढक़र काम कर रही हैं।