ग्वालियर. दीपावली पर मोर बाजार के जरिए जिस तरह मिलावटी मावा खपाया गया था, क्या होली पर भी वही स्क्रिप्ट दोहराई जाएगी? हालात तो कुछ ऐसे ही संकेत दे रहे हैं। 3 मार्च को होली है, बाजार में मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता […]
ग्वालियर. दीपावली पर मोर बाजार के जरिए जिस तरह मिलावटी मावा खपाया गया था, क्या होली पर भी वही स्क्रिप्ट दोहराई जाएगी? हालात तो कुछ ऐसे ही संकेत दे रहे हैं। 3 मार्च को होली है, बाजार में मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता कहीं नजर नहीं आ रही। जानकारों मुताबिक शहर में रोजाना 60 से 70 ङ्क्षक्वटल मावा पहुंच रहा है। मोर बाजार में प्रतिदिन एक से दो गाडिय़ां उतर रही हैं। यह आवक धौलपुर, मुरैना के अंबाह और ङ्क्षभड के मौ से हो रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो यहां जांच दल पहुंच रहे हैं और न ही मावा की नाकाबंदी की कोई ठोस व्यवस्था की गई है।
दीपावली पर मोर बाजार को ही सप्लाई हब बनाकर मिलावट माफिया ने माल खपाया था। तब भी कार्रवाई सवालों के घेरे में रही थी। इस बार भी ङ्क्षभड और मुरैना मार्ग पर कोई चेक पोस्ट नहीं लगाया गया है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ाने के दावे कागजों तक सीमित हैं। आधार कार्ड से बुङ्क्षकग की व्यवस्था भी सख्ती से लागू नहीं हो रही। कार्रवाई के नाम पर विभाग की टीम नमकीन और किराना दुकानों तक सिमट कर रह गई है, जबकि असली खेल मावा मंडियों में चल रहा है।
वर्ष नमूने फेल
2022-------------1036-------------241
2023-------------1064-------------212
2024-------------1004-------------153
2025-------------744-------------58
होली पर मावे की ज्यादा आवक नहीं रहती है। ऐसी दुकानों पर कार्रवाई कर रहे हैं, जहां से आम लोग सामान खरीदते हैं, जिससे सही सामान की बिक्री हो सके।
लोकेंद्र ङ्क्षसह, खाद्य निरीक्षक व दल प्रभारी