
ग्वालियरः मध्य प्रदेश की ग्वालियर पुलिस के चंगुल से छूटकर भागा बांग्लादेशी घुसपैठिया अहमद बख्श सिद्दीकी उर्फ अहमद अल मक्की एक बार फिर ग्वालियर पुलिस के पंजे में है। पुलिस उसे हैदराबाद से गिरफ्तार करके लाई, जहां उससे कई बातों को लेकर पूछताश शुरु हो चुकी है। पुलिस के एक सूत्र से पता चला है कि, घुसपैठिया हैदराबाद में रहकर रोहिंग्या शरणार्थी होने के काग़ज़ात बनवा रहा था, जिनकी मदद से वह देश से भागना चाहता था, लेकिन इससे पहले कि वह अपने मंसूबों में कामयाब हो पाता पुलिस ने उसे दबोच लिया।
कोर्ट ने मक्की को भेजा तीन दिन के रिमाड पर
बता दें कि, पुलिस ने मक्की को गिरफ्तार करके कोर्ट में पैश किया, जहां से अलमक्की को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस को अहमद अल मक्की के हैदराबाद में होने का सुराग पांच दिन पहले लगा था। जिसके फौरन बाद पड़ाव थाना प्रभारी और क्राइम ब्रांच की टीम को हैदराबाद पहुंची, जहां तीन दिन योजनाबद्ध तकीरे से टीमों ने अलमक्की पर नज़र रखी। ग्वालियर और हैदराबाद पुलिस की साझा कार्रवाई में अलमक्की पकड़ में आया।
जेल का दोस्त बना मददगार
पुलिस ने पड़ताल में पता लगाया कि, जैल में सजा काटने के दौरान अलमक्की का याराना गुना का रहने वाला इदरीस से काफी जोरदार था। इसी दोस्त की सहायता से अलमक्की देश से भागने की प्लानिंग कर रहा था। पुलिस के चंगुल से भागने के बाद पुलिस जांच में उसकी मोबाइल कॉल डीटेल और फेसबुक फ्रेंड की सूची की जांची गई, जिसमें मक्की की ज्यातर लोकेशन गुना में देखी गई। यह वही जगह है, जहां घुसपैठिये का जेल बना पक्का दोस्त इदरीस रहता है। जेल पूछकाछ और फेसबुक से गूगल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने इदरीस को भी पकड़ लिया। इसके अलावा, घुसपैठिया अलमक्की एक महिला के भी संपर्क में था, पुलिस ने इस लिंक को भी आधार बनाकर उस तक पहुंच बनाई।
अब जुड़ जाएगी एक और धारा
जब पहली बार चार साल पहले अलमक्की को पुलिस ने पकड़ा था, तब उसे विदेशी अधिनयम, पासपोर्ट के नियम के उल्लंघन का मामला विदेशी अधिनियम धारा 3 के तहत कार्वाई की गई थी। हालांकि, उसके पुलिस गिरफ्त से भागने के बाद उसपर एक धारा और बढ़ा दी जाएगी। पुलिस गिरफ्त से भागने के चलते उसपर लगी पिछली धाराओं के साथ धारा 4 और जोड़ दी जाएगी। दोनों ही, धाराओं में ज्यादा फर्क ना होने के कारण इसपर मिलने वाली सजा में ज्यादा फर्क नहीं है।