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अंचल के 84 सरकारी कॉलेजों में सिर्फ 1 नियमित प्राचार्य, बाकी प्रभारियों के हवाले

सरकार ग्वालियर-चंबल अंचल को एजुकेशन हब बनाने के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां की उच्च शिक्षा खुद बैसाखियों के सहारे रेंग रही है। अंचल के यूजी और पीजी के 84 शासकीय कॉलेजों की कमान संभालने के लिए सरकार के पास नियमित प्राचार्य तक नहीं हैं। स्थिति इतनी शर्मनाक है कि 84 में से 83 कॉलेज सिर्फ प्रभारी प्राचार्यों (प्रोफेसरों) के भरोसे चल रहे हैं।
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ग्वालियर

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Rahul Thakur

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Updated: 6 Nov 2026, 5:52 PM IST

mlb colleage

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ग्वालियर. सरकार ग्वालियर-चंबल अंचल को एजुकेशन हब बनाने के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां की उच्च शिक्षा खुद बैसाखियों के सहारे रेंग रही है। अंचल के यूजी और पीजी के 84 शासकीय कॉलेजों की कमान संभालने के लिए सरकार के पास नियमित प्राचार्य तक नहीं हैं। स्थिति इतनी शर्मनाक है कि 84 में से 83 कॉलेज सिर्फ प्रभारी प्राचार्यों (प्रोफेसरों) के भरोसे चल रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग इस लचर व्यवस्था से पूरी तरह वाकिफ है, फिर भी सब कुछ रामभरोसे छोड़ दिया गया है। एक ओर सरकार हर साल नए कॉलेज खोलकर वाहवाही लूटने में लगी है, तो दूसरी ओर इन संस्थानों में नेतृत्व का भारी टोटा है। ग्वालियर जिले के 14 सरकारी कॉलेजों का हाल तो और भी बुरा है। जिले का सबसे प्रमुख लीड कॉलेज (शासकीय माधवराव ङ्क्षसधिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय) हो या फिर प्रतिष्ठित केआरजी, एमएलबी, साइंस और भागवत सहाय कॉलेज सभी जगह प्रभारवाद की बीमारी जड़ जमा चुकी है। पढ़ाने वाले प्रोफेसरों के कंधों पर प्राचार्य की प्रशासनिक जिम्मेदारी थोप दी गई है, जिससे न तो वे ठीक से कॉलेज चला पा रहे हैं और न ही छात्रों की पढ़ाई पर ध्यान दे पा रहे हैं।

प्रमोशन रुके, पत्राचार रद्दी की टोकरी में
कॉलेजों के इस खस्ताहाल के पीछे सबसे बड़ा कारण लंबे समय से प्राचार्यों के प्रमोशन का न होना है। उच्च शिक्षा विभाग नियमित नियुक्ति देने के बजाय जुगाड़ से काम चला रहा है। एडी (अतिरिक्त संचालक) कार्यालय की तरफ से कई बार शासन को पत्र लिखकर इस गंभीर संकट से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन पत्रों का कोई असर नहीं हो रहा है। सवाल यह है कि जब संस्था का कोई स्थायी मुखिया ही नहीं होगा, तो कॉलेज का विकास और छात्रों का भविष्य कैसे संवरेगा।

फरवरी 2027 के बाद पूरे संभाग में नहीं बचेगा कोई प्राचार्य
संभाग भर में एकमात्र नियमित प्राचार्य प्रो. बीएल अहिरवार हैं, जो ग्वालियर के झलकारी बाई महाविद्यालय में पदस्थ हैं। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग की नींद उड़ाने वाली बात यह है कि फरवरी 2027 में प्रो. अहिरवार भी सेवानिवृत्त (रिटायर) होने वाले हैं। उनके रिटायर होते ही पूरे ग्वालियर-चंबल संभाग में एक भी नियमित प्राचार्य नहीं बचेगा। यानी पूरा का पूरा संभाग 100 फीसदी प्रभारी प्राचार्यों के हवाले हो जाएगा।

हम कई बार शासन को पत्र लिख चुके है। ग्वालियर चंबल संभाग में सिर्फ झलकारी बाई कॉलेज में ही नियमित प्राचार्य है। अभी डीपीसी की प्रक्रिया चल रही है उम्मीद है जल्द ही नियमित प्राचार्य मिलेंगे।
प्रो. कुमार रत्नम, क्षेत्रीय अधिकारी ग्वालियर-चंबल संभाग उच्च शिक्षा विभाग