उज्ज्वला योजना के आंकड़ों ने खोली हकीकत, दमोह में चूल्हा जलाने को मजबूर हुए 90% परिवार
Pradhan Mantri Ujjwala Yojana: उज्ज्वला योजना के तहत 2.25 लाख से अधिक गैस कनेक्शन जारी हुए, लेकिन महंगी गैस के कारण औसत सालाना खपत सिर्फ 1.69 सिलेंडर रह गई है। ग्रामीण परिवार लकड़ी-चूल्हे पर लौट रहे हैं।
Damoh news: महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाने और रसोई तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दमोह जिले में 2.25 लाख से अधिक गैस कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। लेकिन महंगी गैस के चलते अब ग्रामीण परिवार नियमित रूप से सिलेंडर रीफिल नहीं करा पा रहे हैं। योजना के तहत कनेक्शन जारी करने के बड़े आंकड़ों के बीच रीफिल की स्थिति स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल की वास्तविक तस्वीर सामने ला रही है। पीएमयूवाई की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में जिले में प्रति कनेक्शन औसत खपत 1.69 सिलेंडर रही। इस आधार पर पूरे जिले में सालभर में करीब 3.81 लाख सिलेंडर रीफिल होने का अनुमान है। वहीं यदि प्रत्येक परिवार साल में 12 सिलेंडर भरवाता तो यह संख्या 27 लाख से अधिक होती। यानी उपलब्ध औसत खपत संभावित जरूरत के मुकाबले बेहद कम है।
लगातार नहीं भरवा पा रहे सिलेंडर
जिले में उज्ज्वला योजना के 2,23,645 और उज्ज्वला 2.0 के 1,999 कनेक्शन जारी किए गए है। इस तरह कुल कनेक्शन की संख्या 2,25,644 पहुंच गई है। लेकिन इतने बड़े लाभार्थी वर्ग के बावजूद औसत रीफिल खपत बेहद कम है। कई परिवार सालभर में केवल एक या दो सिलेंडर ही भरवा रहे हैं। इससे कनेक्शन जारी करने और परिवारों तक लगातार स्वच्छ ईंधन उपलब्ध रहने के बीच बड़ा अंतर सामने आ रहा है। गैस की कीमत और परिवारों की आर्थिक स्थिति नियमित रीफिल में बाधा बन रही है। यदि जिले के सभी उज्ज्वला कनेक्शनधारी परिवार साल में 12 बार सिलेंडर भरवाते तो करीब 27.07 लाख सिलेंडर रीफिल होते। लेकिन उपलब्ध औसत खपत के आधार पर यह संख्या करीब 3.81 लाख ही है। ऐसे में स्वच्छ ईंधन के नियमित इस्तेमाल को लेकर योजना के सामने चुनौती बनी हुई है
महिलाएं बोलीं- चूल्हे पर खाना बनाना मजबूरी, शौक नहीं
ग्राम आनू निवासी रमाबाई का कहना है कि सिलेंडर भरवाना अब बस की बात नहीं है। ऐसे में लकड़ी पर ही खाना बना लेते हैं। गांव की ही सुनीता ने बताया कि जब पैसे होते हैं तभी गैस भरवाते हैं। चूल्हे पर खाना बनाना मजबूरी है, शौक नहीं। उनका कहना है कि सब्सिडी भी अब पहले जितनी नहीं मिलती। ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की कीमत बढ़ने के कारण परिवार लकड़ी, गोबर के उपले, फसल अवशेष और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं कुछ जगहों पर चोरी-छिपे बिजली के हीटर का उपयोग भी बढ़ने की बात सामने आ रही है।
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2,23,645 उज्ज्वला कनेक्शन 1,999 उज्ज्वला 2.0 कनेक्शन 2,25,644 कुल कनेक्शन 1.69 सिलेंडर प्रति कनेक्शन सालाना औसत खपत करीब 3.81 लाख अनुमानित सालाना रीफिल करीब 27.07 लाख सिलेंडर सालाना संभावित खपत, यदि प्रत्येक परिवार 12 सिलेंडर भरवाए