ग्वालियर

मध्यप्रदेश… दादा-परदादा का घर अब होगा अपना, मिलेगा मालिकाना हक

दादा-परदादा का जीवन जिस घर में बीत गया, जिस आंगन में तीन-चार पीढिय़ां बड़ी हो गईं, पर उस घर पर ग्रामीण का हक नहीं था! सुनकर झटका लग सकता है, लेकिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों ...
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Jun 06, 2026
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ग्वालियर. दादा-परदादा का जीवन जिस घर में बीत गया, जिस आंगन में तीन-चार पीढिय़ां बड़ी हो गईं, पर उस घर पर ग्रामीण का हक नहीं था! सुनकर झटका लग सकता है, लेकिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की यही कड़वी हकीकत थी। चूंकि गांव की जमीनें नजूल आबादी के तहत दर्ज थीं, इसलिए तकनीकी रूप से ग्रामीण सरकारी जमीन पर बसे हुए थे, लेकिन जमीन पर हक सरकार का था। अब बरसों पुराना दर्द दूर होने जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत अब ग्रामीणों को उनके आशियाने का असली मालिकाना हक मिलने जा रहा है।

जिले में इस योजना का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। अब तक जिले के 496 में से 418 गांवों का सर्वे कार्य पूरी तरह से कंप्लीट हो चुका है। इस सर्वे के बाद जिले के 86 हजार 698 घरों की जमीन पूरी तरह से निजी (स्वामित्व वाली) हो जाएगी। दरअसल स्वामित्व योजना के तहत राज्य सरकार रजिस्ट्री कराएगी। बीते दिनों हुई कैबिनेट की बैठक में इसका प्रस्ताव पास किया गया है।

शहर की तर्ज पर मिलेगा होम लोन, होगी रजिस्ट्री

  • इस योजना के लागू होने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर और तकदीर दोनों ही बदलेंगी। मालिकाना हक मिलते ही ग्रामीणों को कई बड़े फायदे मिलेंगे।
  • आसानी से मिलेगा होम लोन: अब तक बैंकों से लोन न मिल पाने के कारण ग्रामीण पक्का मकान बनाने या व्यापार शुरू करने से महरूम रह जाते थे। अब शहर की तर्ज पर ग्रामीण भी अपने घर के कागजात पर होम लोन ले सकेंगे। बैंक में गांव का मकान को गिरवी रखने की बात करने पर बैंक मना कर देती थी।
  • बनवा सकेंगे क्रेडिट: ग्रामीण अपने मकान पर बैंक क्रेडिट (सीसी) लिमिट भी बनवा सकेंगे, जिससे उन्हें खेती या व्यवसाय के लिए पूंजी मिल सकेगी।
  • रजिस्ट्री और नामांतरण: पंजीयन विभाग में अब इन मकानों की बकायदा रजिस्ट्री हो सकेगी और पैतृक संपत्ति का नामांतरण (उत्तराधिकार) आसानी से हो सकेगा।

अब तक नोटरी पर बिकते थे घर, बंदिशों से मिलेगी मुक्ति

  • गांवों में जमीन का सरकारी रिकॉर्ड नहीं था। ग्रामीण सिर्फ नोटरी के भरोसे जगह का सौदा करते थे, जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं होती थी।
  • जमीन किसके नाम पर है और कहां तक है, सटीक रिकॉर्ड न होने से गांवों में विवाद आम थे। अब डिजिटल नक्शे और मालिकाना हक मिलने से ये कानूनी विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे।
  • रोजगार की तलाश में ग्रामीण आबादी तेजी से शहर की ओर जा रही है। पीछे गांव के घर खाली छूट जाते थे। जब ये लोग वापस लौटते थे, तो दबंगों द्वारा कब्जों की शिकायतें आती थीं।

इनका कहना है

418 गांव का सर्वे पूरा हो गया है, शेष गांव का सर्वे जारी है। ग्रामीण को गांव में जमीन पर मालिकाना हक मिल रहा है। इससे लोन भी ले सकते हैं। विवाद भी खत्म होंगे।
मुन्ना ङ्क्षसह गुर्जर, अधीक्षक भू अभिलेख

Updated on:
06 Jun 2026 06:17 pm
Published on:
06 Jun 2026 06:17 pm