ग्वालियर. इन दिनों एंड्रॉयड एप्लीकेशन पैकेज यानी एपीके फाइल साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बनकर सामने आई है। फर्जी लिंक या फाइल भेजकर लोगों के मोबाइल में ऐप इंस्टॉल कराए जाते हैं और फिर बैंक खाते से रकम निकाल ली जाती है। इससे बचने के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आइ4सी) को गूगल […]
ग्वालियर. इन दिनों एंड्रॉयड एप्लीकेशन पैकेज यानी एपीके फाइल साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बनकर सामने आई है। फर्जी लिंक या फाइल भेजकर लोगों के मोबाइल में ऐप इंस्टॉल कराए जाते हैं और फिर बैंक खाते से रकम निकाल ली जाती है। इससे बचने के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आइ4सी) को गूगल से समन्वय करना होगा, तभी इस पर लगाम कसेगी। इसमें केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। दो महीने में ही मप्र के 113 और ग्वालियर के 9 मामलों में 10 से 11 करोड़ की ठगी सिर्फ एपीके फाइल से हो चुकी है। साइबर ठग लगातार इसे ही हथियार बनाए हुए हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में साइबर ठगी के 86,420 मामले दर्ज हुए हैं। इससे साफ है कि साइबर ठगी अब संगठित उद्योग की तरह संचालित हो रही है। प्रदेश में पिछले दो महीनों में एपीके फाइल के जरिए ठगी के 113 मामले सामने आए हैं, जबकि ग्वालियर जिले में ही इस तरह की 9 वारदातें हो चुकी हैं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन होने के कारण ठगों की नई चाल पर रोक लगाना आसान नहीं है। पर्दे के पीछे काम कर रही हाईटेक टीम… साइबर कमांडो शैलेंद्र के अनुसार साइबर ठगी के पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। सामने सिर्फ कॉल करने वाले या मैसेज भेजने वाले लोग दिखते हैं, लेकिन इनके पीछे ऐसी तकनीकी टीमें होती हैं जो फर्जी ऐप और सॉफ्टवेयर तैयार करती हैं। पुलिस जब तक एक तरीके का तोड़ ढूंढती है, तब तक ठग नया तरीका निकाल लेते हैं।
डिजिटल ठगी का नेटवर्क मजबूत
-साइबर पुलिस के अनुसार प्रदेश में डिजिटल फ्रॉड का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।
-वर्ष 2024 में ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के 505 मामले दर्ज हुए।
-वर्ष 2025 में यह संख्या 404 रही।
-वर्ष 2026 में अब तक 113 केस सामने आ चुके हैं। इनमें करीब 48 प्रतिशत मामलों में एपीके फाइल के जरिए ठगी की गई है।
ऐसे फंसाते हैं साइबर ठग
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ठग लोगों को व्हाट्सएप, टेलीग्राम और एसएमएस के जरिए एपीके फाइल भेजते हैं। इन फाइलों को अक्सर इन बहानों से भेजा जाता है— केवाईसी अपडेट, बैंक वेरिफिकेशन, बिजली बिल भुगतान, आरटीओ चालान, सरकारी योजनाएं, त्योहारी बधाई संदेश जैसे ही व्यक्ति फाइल डाउनलोड करता है, मोबाइल का कंट्रोल ठगों के पास पहुंच जाता है और बैंक खाते से रकम साफ हो जाती है।
कड़ी कार्रवाई जरूरी
एपीके फाइल गूगल प्ले स्टोर के बाहर से डाउन लोड होती है उस पर निगरानी बेहद मुश्किल है। साइबर ठग इसे आसान और सुरक्षित हथियार मानते हैं। साइबर अपने स्तर पर एपीके फाइल से ठगी की कोशिश में जुटी है। लेकिन ठोस कदम इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आइ4सी) को गूगल से समन्वय करना होगा, तभी इस पर लगाम कसेगी।
संजीव नयन शर्मा, डीएसपी स्टेट साइबर सेल