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ग्वालियर : बदलती लाइफस्टाइल बिगाड़ रही महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ, 30-40% महिलाएं पीएमओएस की चपेट में

सुबह की भागदौड़, घंटों मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन के सामने बिताया जा रहा समय, बाहर का खाना, कम होती नींद और बढ़ता तनाव… आधुनिक लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा असर अब महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ पर दिखाई देने लगा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे पीएमओएस (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) के मामलों ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। कमलाराजा अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 30 महिलाएं पीएमओएस की जांच और परामर्श के लिए पहुंच रही हैं।

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कमलाराजा अस्पताल की ओपीडी में रोज पहुंच रहीं 30 महिलाएं,

कमलाराजा अस्पताल की ओपीडी में रोज पहुंच रहीं 30 महिलाएं,

कमलाराजा अस्पताल की ओपीडी में रोज पहुंच रहीं 30 महिलाएं, विशेषज्ञ बोले- समय रहते जांच और लाइफस्टाइल सुधार बेहद जरूरी
ग्वालियर।
सुबह की भागदौड़, घंटों मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन के सामने बिताया जा रहा समय, बाहर का खाना, कम होती नींद और बढ़ता तनाव… आधुनिक लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा असर अब महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ पर दिखाई देने लगा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे पीएमओएस (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) के मामलों ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। कमलाराजा अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 30 महिलाएं पीएमओएस की जांच और परामर्श के लिए पहुंच रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र की करीब 30 से 40 प्रतिशत महिलाओं में पीएमओएस के लक्षण पाए जा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में इसके मामलों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि कम उम्र की लड़कियों और कामकाजी महिलाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।

क्या है पीएमओएस?

पीएमओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जिसमें महिलाओं के शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लगता है। इससे ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं और ओव्यूलेशन प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल महिला रोग नहीं, बल्कि पूरी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या बन चुका है।

पीएमओएस और पीसीओएस में अंतर

डॉक्टर बताते हैं कि पहले इसे पीसीओएस कहा जाता था, लेकिन अब इसे व्यापक रूप से पीएमओएस के रूप में समझाया जा रहा है, ताकि लोग इसे केवल ओवरी तक सीमित बीमारी न समझें। पीसीओएस मुख्य रूप से ओवरी में बनने वाले सिस्ट और हार्मोनल असंतुलन से जुड़ा शब्द था, जबकि पीएमओएस में मेटाबॉलिज्म, इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन, मानसिक स्वास्थ्य और हार्मोन सभी प्रभावित होते हैं।

शरीर देता है कई संकेत

पीएमओएस के लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं। इनमें अनियमित पीरियड्स, तेजी से वजन बढ़ना, वजन कम करने में परेशानी, चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल, मुंहासे, बाल झड़ना, थकान, मूड स्विंग, नींद प्रभावित होना और गर्भधारण में परेशानी जैसी समस्याएं शामिल हैं।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने पर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉइड, इंफर्टिलिटी, एंग्जाइटी, डिप्रेशन और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

हार्मोनल बदलाव बढ़ा रहे परेशानी

पीएमओएस में शरीर में इंसुलिन और एंड्रोजन हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लगता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने से वजन तेजी से बढ़ता है, जबकि एंड्रोजन हार्मोन बढ़ने से चेहरे पर बाल और पिंपल्स जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं। ओव्यूलेशन प्रभावित होने से पीरियड्स भी अनियमित हो जाते हैं।

लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव से मिल सकती है राहत

डॉक्टरों के अनुसार दवा के साथ लाइफस्टाइल सुधार सबसे जरूरी है। इसके लिए रोजाना 30 से 45 मिनट एक्सरसाइज, जंक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी, प्रोटीन और फाइबर युक्त संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद, कम स्क्रीन टाइम और तनाव से बचाव जरूरी है। साथ ही समय-समय पर जांच कराना भी बेहद आवश्यक है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम राजपूत के अनुसार अधिकतर महिलाएं शुरुआती लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। महिलाएं औसतन 6 महीने से 1 साल बाद जांच कराने पहुंचती हैं, तब तक कई बार स्थिति गंभीर हो जाती है। उनका कहना है कि समय रहते जांच और लाइफस्टाइल में बदलाव से पीएमओएस को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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