जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बिना सूचना के ट्रेन का मार्ग परिवर्तन करने के मामले को सेवा में कमी मानी है। फोरम ने कहा कि मार्ग परिवर्तित करने के बाद रेलवे ने यात्री को वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की...
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बिना सूचना के ट्रेन का मार्ग परिवर्तन करने के मामले को सेवा में कमी मानी है। फोरम ने कहा कि मार्ग परिवर्तित करने के बाद रेलवे ने यात्री को वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। इस कारण एक 77 साल की बुजुर्ग यात्री को मानसिक व शारीरिक पीड़ा उठानी पड़ी है। उन्हें अयोध्या पहुंचने के लिए लखनऊ से टैक्सी करनी पड़ी। परिवादी ने टैक्सी किराए में जो खर्च हुआ है, उसका पैसा, मानसिक पीड़ा व केस लडऩे के खर्च सहित 13 हजार 670 रुपए 45 दिन के भीतर अदा किए जाएं। 45 दिन में रेलवे को यह पैसा भुगतान करना होगा। यदि निर्धारित तिथि के बाद पैसा दिया जाता है तो 7 फीसदी ब्याज देना होगा।
दरअसल जनकगंज निवासी शशि त्रिवेदी ने अपने पुत्र के साथ राम जन्म भूमि अयोध्या व काशी विश्वनाथ वाणारसी के दर्शन के लिए मई 2023 में टिकट बुक किए। ग्वालियर से अयोध्या के लिए सूरज मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस में 26 जून 2023 का टिकट बुक था। 26 जून को ट्रेन में सवार हुए। ट्रेन लखनऊ पहुंचने के बाद टीटीई ने सूचना दी कि ट्रेन आगे नहीं जाएगी। इसका मार्ग परिवर्तित हो गया है। इसलिए लखनऊ में उतर जाएं। टीटीई का मार्ग परिवर्तित करने का कारण पूछा तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। शशि त्रिवेदी को लखनऊ में उतरना पड़ा। लखनऊ से 4 हजार 670 रुपए की टैक्सी की। टैक्सी से अयोध्या पहुंचे। उन्होंने रेलवे के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया। उनकी ओर से तर्क दिया कि ट्रेन के मार्ग परिवर्तन की पूर्व में कोई सूचना नहीं दी। थर्ड एसी में टिकट कराया था। बीच रास्ते में उतरने पर काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। फोरम ने रेलवे व परिवादी का तर्क सुनने के बाद कहा कि यह प्रमाणित है, यात्री को उसके गंतव्य तक नहीं ले जाया गया। उसे बीच रास्ते में छोड़ दिया। जिससे 77 साल की बुजुर्ग यात्री को मानसिक रूप से परेशान होना पड़ा।
रेलवे ने तर्क दिया कि मामला उत्तर मध्य रेलवे झांसी मंडल का नहीं है। उत्तर रेलवे के क्षेत्र में घटना घटी है। किसी ट्रेन का मार्ग रेलवे अपनी इच्छा के अनुसार नहीं करता है। दुर्घटना, प्राकृतिक सहित अन्य कारणों से मार्ग परिवर्तित करना पड़ता है। परिवादी ने रेलवे टिकट का पैसा नहीं मांगा है। उसने अपने निजी खर्च का पैसे की मांग की है, जो टैक्सी में खर्च किया। यह मामला लखनऊ का है, इसलिए सुनवाई का अधिकार क्षेत्र भी ग्वालियर नहीं है। इसलिए परिवाद को खारिज किया जाए।
इस तरह से जोड़ा गया खर्च
टैक्स खर्च-4670
मानसिक कष्ट के- 5000
अधिवक्ता शुल्क-4000